चुनाव आयोग ने बुधवार(4 जनवरी) को पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस बार चुनाव उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराख्ांड शामिल हैं लेकिन पूरे देश की निगाह यूपी पर ही टिकी रहेंगी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा भी यहां के चुनाव से जुड़ी है क्योंकि वह खुद यूपी के वाराणसी से सांसद हैं और यूपी को हमेशा से ही दिल्ली का दरवाजा कहा जाता है। मोदी ने कालेधन पर हमला करते हुए नोटबंदी जैसा बड़ा कदम उठाया था। चुनाव आयोग भी इस बार के इलेक्शन में कालेधन को रोकने और भ्रष्ट नेताओं पर लगाम लगाने के लिए विधानसभा चुनाव में कई नई पहल करने जा रहा है।
यूपी के भ्रष्ट नेताओं पर लगाम के लिए EC ने उठाए ये 7 कदम
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डिफॉल्टर नेताओं पर लगेगी लगाम-नो डिमांड सर्टिफिकेट होंगे जमा
चुनाव में खड़े होने वाले प्रत्याशियों को इस बार एक नो-डिमांड सर्टिफिकेट भी जमा कराना होगा। इसमें पानी, बिजली और सरकारी मकान की वो राशि जो अब तक जमा नहीं की गई है उसकी भी जानकारी देनी होगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि प्रत्याशियों पर सरकारी सेवाओं का बिल भुगतान न करने के मामले अक्सर ही सामने आते रहे हैं।
'पेड न्यूज' पर लगाम
चुनाव आयोग इस बार उन चैनलों या मीडिया पर भी नजर रखेगी जिन्हें चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार या पार्टी से संबंधित लोग चलाते हैं। इन चैनलों या मीडिया हाउस द्वारा किए जाने वाले प्रचार को उम्मीदवार के चुनावी खर्च की राशि में ही जोड़ दिया जाएगा।
चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल पर ऐसे लगेगी लगाम
इस बार 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में कालेधन के प्रयोग को रोकने के लिए चुनाव को कैशलेस बनाने के लिए भी चुनाव आयोग ने कदम उठाया है। इसके लिए चुनाव आयोग ने निर्देश जारी किया है कि कोई भी उम्मीदवार चुनाव प्रचार के दौरान 20 हजार रुपए से ज्यादा की नकद राशि नहीं खर्च करेगा। इससे ज्यादा रकम का भुगतान चेक या ऑनलआइन के जरिए ही किया जाए। इस घोषणा से पहले ही आयोग घोषित कर चुका है कि किसी भी उम्मीदवार या पार्टी को 20,000 से ज्यादा नकद चंदा नहीं लेने की हिदायत दी है।
ईवीएम में दिखेगा चुनाव चिन्ह के साथ प्रत्याशी का चेहरा
विधानसभा चुनाव में मतदाता अपने क्षेत्र के उम्मीदवार को लेकर किसी भ्रम में न पड़े इसलिए चुनाव आयोग ने ईवीएम मशीन में एक खास फीचर लाने का फैसला किया है। ईवीएम मशीन में इस बार पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ उम्मीदवार का फोटो भी लगा होगा। आम तौर पर कुछ प्रत्याशी सामने वाले को हराने के लिए उससे मिलते जुलते नाम के कई प्रत्याशी खड़े कर देते हैं जो महज 'वोटकटुआ' ही होते हैं।