पूर्वी दिल्ली की जीवनरेखा और 52 एकड़ में फैली संजय झील अब अपने पुराने गौरव को हासिल करेगी। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने झील और उसके आसपास के 165 एकड़ संरक्षित वन क्षेत्र के पुनरुद्धार कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया और स्पष्ट किया कि इस प्राकृतिक संपदा को उसकी पुरानी चमक वापस लौटाना नॉन-नेगोशिएबल (अपरिहार्य) है। एलजी ने दिल्ली विकास प्राधिकरण और दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वे मिशन मोड में काम करते हुए दल्लूपुरा एसटीपी से उपचारित पानी की निरंतर आपूर्ति यहां सुनिश्चित करें, ताकि झील का जलस्तर बना रहे।
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उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने किया संजय झील का दौरा
- फोटो : अमर उजाला
लगेंगे ये पेड़
झील की पारिस्थितिक जैव विविधता को बढ़ाने के लिए वहां 5,000 स्थानीय (नेटिव) पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में यहां यूकेलिप्टस, नीम, अर्जुन, पापड़ी और अशोक जैसे पेड़ मौजूद हैं, लेकिन नई योजना के तहत मिट्टी की सेहत और वातावरण को देखते हुए कनीर, चंपा और पिलखन जैसी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह कदम न केवल प्रदूषण कम करेगा, बल्कि कल्याणपुरी, त्रिलोकपुरी और मयूर विहार फेज-2 जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के लिए शुद्ध हवा का स्रोत बनेगा।
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उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने किया संजय झील का दौरा
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गंदा पानी और गाद बीते दिनों की होगी बात
एलजी ने झील की दयनीय स्थिति, गाद और कचरे के जमाव पर सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल सफाई के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में झील से लगातार खरपतवार और काई हटाने का काम चल रहा है। पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए भविष्य में बायो-रेमेडिएशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा और ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने के लिए झील में फव्वारे लगाए जाएंगे।
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उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने किया संजय झील का दौरा
- फोटो : अमर उजाला
दो चरणों में बदलेगी तस्वीर
पुनरुद्धार का कार्य दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण को अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जिसमें रुके हुए पानी को झील तक पहुंचाना और पैदल रास्तों (पाथवे) की मरम्मत शामिल है। दूसरा चरण मई 2027 तक चलेगा, जिसमें बायो-स्वैल्स की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि बारिश का पानी सीधे जमीन के अंदर जाए और भूजल स्तर में सुधार हो सके। एलजी ने मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए जियो-टेक्सटाइल तकनीक के उपयोग करने को कहा है।
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संजय झील की टूटी दीवार
- फोटो : संवाद
विभागीस सुस्ती नहीं चलेगी
काम में देरी को रोकने के लिए उपराज्यपाल ने डिपार्टमेंटल साइलोस (विभागीय खींचतान) को खत्म करने की बात कही है। उन्होंने पार्क के प्रबंधन में स्थानीय आरडब्ल्यूए को शामिल करने और सीएसआर फंड का उपयोग करने का सुझाव दिया है। उनका विजन है कि संजय झील न केवल एक पर्यटन स्थल बने, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक लचीला और टिकाऊ ब्लू-ग्रीन एसेट साबित हो।