40 करोड़ के कालेधन को सफेद करने और बोगस कंपनियों के जरिये सोने की खरीदारी के पूरे कांड में सीए राजीव सिंह कुशवाहा का नाम मास्टर माइंड के तौर पर सामने आ रहा है। पूरी साजिश के पीछे कुशवाहा का ही दिमाग काम कर था। इस मामले में 12 अन्य लोगों पर भी ईडी की नजर है। एक्सिस बैंक के प्रबंधकों से पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। बैंक प्रबंधक शोभित सिन्हा की निशानदेही पर ईडी ने सोने की ईंट लखनऊ से बरामद की है। पूरी साजिश कालेधन को सफेद करने के लिए सोने के इर्द गिर्द घूम रही है। इसमें सीए, बड़े सराफा कारोबारी, ज्वेलर व हवाला कारोबारी शामिल हैं।
40 करोड़ नोट बदली कांड: साजिश के पीछे चल रहा था सीए का दिमाग
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नोटबंदी के बाद कालेधन वालों से ज्वेलरों ने संपर्क साधा और 45 से 50 हजार प्रति तोला के दाम पर बुकिंग कर ली। इस तरह जमा हुए कालेधन को ज्वेलरों ने बैंकिंग तंत्र में डाला। इस काम में कई बोगस कंपनियों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। इन बोगस कंपनियों को सीए राजीव सिंह कुशवाहा ने बनाया था। कुशवाहा के साथ इस मामले में देवेंद्र कुमार झा व राजकुमार शर्मा का नाम भी सामने आया है।
सीए कुशवाहा ने कालेधन को सफेद करने के लिए हिमालया इंटरनेशनल, आरडी ट्रेडर्स व सनराइज ट्रेडिंग समेत कई बोगस कंपनियों का निर्माण किया था। इन कंपनियों के खाते एक्सिस बैंक की कश्मीरी गेट शाखा में थे। इन खातों का इस्तेमाल बैंक अधिकारियों विनीत गुप्ता व शोभित सिन्हा से मिलकर कालाधन सफेद करने के लिए किया गया।
ईडी के मुताबिक, इन खातों में एक बार में 90 से 99 लाख रुपये के बीच ही डाले गए, ताकि यह लेनदेन सरकारी एजेंसियों की नजर में न आए। इनमें एक दिन में कई बार पैसे जमा किए गए। इसके बाद इन खातों से यह पैसा एक अन्य बोगस कंपनी बीगल मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के खाते में आरटीजीएस से भेजा गया। इस कंपनी का निदेशक एक मजदूर रामचरण को बनाया, जो झुग्गी में रहता है।
सीए राजीव सिंह व ज्वेलरों के निर्देश पर बीगल के खातों में जमा कालेधन को आरटीजीएस के जरिये मैसर्स आदि ट्रेडर्स, मैसर्स सिद्धि विनायक ज्वेलर्स, तुषार ज्वेलर्स समेत कई सराफा कारोबारियों के खातों में सोना खरीद के नाम पर ट्रांसफर किए गए। जबकि असलियत में बीगल ने सोने की डिलीवरी नहीं ली, बल्कि केवल उसके बोगस बिल बनाए गए और सोने की डिलीवरी दूसरे ज्वेलर्स को की गई, जिन्होंने इसे आगे ग्राहकों को बेच दिया। पहले बोगस कंपनियों और फिर बीगल के खातों और उनसे सर्राफा कारोबारियों के खातों में आरटीजीएस से पैसा ट्रांसफर करने की साजिश को अंजाम दिया बैंक अधिकारियों ने और उसके लिए उन्हें दी गई सोने की ईंटें।