सहकारी बैंक के एमडी दीपक कुमार के खिलाफ विजिलेंस ने शुरू की आय से अधिक संपत्ति की जांच
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आय से अधिक संपत्ति के आरोप में उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक दीपक कुमार के खिलाफ विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। एमडी की संपत्ति को लेकर हुई शिकायतों के बाद इंटेलीजेंस से मिले इनपुट के आधार पर शासन ने विजलेंस से खुली जांच करवाने का फैसला किया है।
दरअसल, प्रबंध निदेशक के खिलाफ काफी समय से आय से अधिक संपत्ति को लेकर शिकायतों का सिलसिला चल रहा था। इनमें उनकी संपत्ति, वाहन के अलावा बेनामी संपत्तियाें का जिक्र किया गया था। शासन ने इन शिकायताें को गंभीरता से लेकर इटेलीजेंस विभाग से गोपनीय जांच पड़ताल कराई थी।
जांच में शिकायतों की पुष्टि होने के बाद इंटेलीजेंस से मिले तथ्यों के आधार पर शासन ने 17 दिसंबर, 2018 को विजिलेंस को खुली जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सहकारी बैंक का मुख्यालय हल्द्वानी में है। इसी नाते विजिलेंस मुख्यालय ने विजिलेंस के हल्द्वानी सेक्टर को खुली जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।
एमडी पद पर नियुक्ति में भी अनियमितताएं
विजिलेंस ने प्रबंध निदेशक के खिलाफ साक्ष्य संकलन का कार्य शुरू कर दिया है। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि खुली जांच में आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक दीपक कुमार का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति की शिकायतों में कोई सच्चाई नहीं है। वह हर जांच का सामना करने को तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सहकारी बैंक का एमडी बनने के बाद से कुछ लोग उनके खिलाफ साजिश के तहत अनर्गल शिकायत करने में लगे हैं।
राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक के पद पर दीपक कुमार की नियुक्ति भी सवालाें के घेरे में है। जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक काडर से राज्य सहकारी बैंक में प्रतिनियुक्ति पर आए दीपक कुमार को राज्य सहकारी बैंक का प्रबंध निदेशक बनाया गया था। शिकायतों के बीच शासन ने सहकारिता सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम से जांच कराई तो खुलासा हुआ कि उनकी नियुक्ति में कई तरह की अनियमितताएं बरती गई हैं। आरोप है कि दीपक कुमार की नियुक्ति की फाइल अनुमोदन को न तो मंत्री और न ही मुख्यमंत्री के पास भेजी गई। सचिव सहकारिता ने एमडी की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की सिफारिश शासन से की थी।