उत्तरकाशी के पुरोला में सामने आए नाबालिग हिंदू लड़की को भगाने के मामले ने इतना तूल पकड़ा कि देवभूमि की शांत फिजाओं में नफरत और सांप्रदायिकता का जहर घुलता चला गया। विरोध, प्रदर्शन, तोड़फोड़, पोस्टरबाजी के बीच अब महापंचायत रोकना पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
धीरे-धीरे पहाड़ के कई कस्बे और बाजार इस नफरती आंधी की चपेट में आ गए हैं। 13 मुस्लिम परिवार पलायन कर चुके हैं। सरकार ने सत्यापन अभियान छेड़ दिया है। उधर, मंगलवार को देश के 52 पूर्व आईएएस-आईएफएस अफसरों ने भी राज्य सरकार को चिट्ठी लिखते हुए महापंचायत पर रोक की मांग की है।
दरअसल, 26 मई को पुरोला कस्बे में अचानक यह ''लव जेहाद'' की घटना सामने आई, जिसमें एक मुस्लिम युवक उबैद और एक अन्य युवक जितेंद्र सैनी को स्थानीय लोगों ने 9वीं कक्षा की नाबालिग स्थानीय हिंदू लड़की के साथ पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। पुलिस ने दोनों युवकों के खिलाफ पोक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।
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उत्तरकाशी लव जिहाद मामले ने पकड़ा तूल
- फोटो : amar ujala
इस घटना के बाद से पुरोला में संप्रदाय विशेष के खिलाफ विभिन्न संगठनों ने मोर्चा खोल दिया। संगठनों का दावा है कि युवक लड़की को बहका रहे थे। संप्रदाय विशेष के लोगों की दुकानों पर 15 जून से पहले दुकानें खाली करने और इलाका छोड़कर जाने से संबंधित पोस्टर चिपकाए गए। पुरोला में संप्रदाय विशेष के कारोबारियों की गारमेंट्स, फर्नीचर, फल, सब्जी और मोटर मैकेनिक की कई दुकानें हैं। इनमें से काफी लोग इलाका छोड़ चुके हैं। घटना के विरोध में उत्तरकाशी के पुरोला और बड़कोट में जुलूस के दौरान व्यापारियों के प्रतिष्ठानों के बोर्ड और बैनर भी फाड़े गए।
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उत्तरकाशी पुरोला विवाद
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बड़कोट में दुकानों पर क्रॉस के चिन्ह लगाए गए, जबकि पुरोला में पोस्टर चिपकाए गए। देवभूमि रक्षा अभियान की ओर से लगाए गए पोस्टरों पर लिखा है था कि, “लव जिहादियों को सूचित किया जाता है कि दिनांक 15 जून 2023 को होने वाली महापंचायत से पूर्व अपनी दुकानें खाली कर दें। यदि तुम्हारे द्वारा ऐसा नहीं किया जाता तो वह वक्त पर निर्भर करेगा।
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उत्तरकाशी पुरोला विवाद
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मामले में पुलिस ने कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस बीच पुरोला ब्लॉक के ग्राम प्रधान संगठन ने 15 जून को महापंचायत का एलान कर दिया। सोमवार को संगठन के अध्यक्ष अंकित सिंह रावत ने इसे शांतिपूर्ण आयोजन बताते हुए एसडीएम को ज्ञापन भी दे दिया। दूसरी ओर, सोमवार को ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी इस विवाद में कूद पड़े। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि भाजपा सरकार का काम है कि गुनहगारों को जेल भेजे और जल्द अमन कायम हो।
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उत्तरकाशी पुरोला विवाद
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15 जून को होने वाली महा पंचायत पर तुरंत रोक लगाई जाए। वहां रह रहे लोगों को सुरक्षा प्रदान की जाए। वहां से पलायन कर गए लोगों को वापस बुलाने का इंतजाम किया जाए। मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चाओं में आ गया। सोमवार से मंगलवार रात तक ट्वीटर पर यह मामला ट्रेंड कर रहा है। पुरोला के साथ ही कई अन्य कस्बों में भी विरोध के सुर तेज हो गए हैं।