फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

लद्दाख में शहीद बेटे का पार्थिव शरीर देखने को तीन दिन से तरस रहे घरवाले, कल घर पहुंचेगा शव

Tue, 21 Jul 2020 10:46 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लालपुर (ऊधमसिंह नगर)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लालपुर (ऊधमसिंह नगर) Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 21 Jul 2020 10:46 PM IST
विज्ञापन
Uttarakhand Soldiers Martyr In Ladakh: Parents and friends with for dead body from three days
- फोटो : अमर उजाला

लद्दाख में शहीद देव बहादुर की पार्थिव देह का गांव पहुंचने का इंतजार परिजनों के साथ ही क्षेत्र के लोगों को भी बेसब्री से है। इसके साथ ही उन दोस्तों को भी शव का इंतजार है, जिनका बचपन से लेकर जवान होने तक का सफर देव के साथ गुजरा। ये दोस्त हर सुख-दुख में हमेशा एक-दूसरे के साथ रहे। शहीद के साथ बिताए लम्हों को याद कर दोस्त भावुक हो जाते हैं। उनकी आंखें डबडबा जाती हैं। शहीद के दोस्त जिंदगी का दामन छोड़ चुके अपने जिगरी दोस्त के अंतिम दर्शन के लिए तरस रहे हैं।

Uttarakhand Soldiers Martyr In Ladakh: Parents and friends with for dead body from three days
- फोटो : अमर उजाला

जानकारी के अनुसार, शहीद देव बहादुर का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह करीब सात बजे उनके गौरीकला स्थित आवास पर पहुंचेगा। शहीद के भाई ग्वालियर में तैनात सैनिक किशन बहादुर ने बताया कि लद्दाख से फोन पर सेना के सीओ ने जानकारी दी है कि मंगलवार को दोपहर डेढ़ बजे लद्दाख से सेना का वायुयान शहीद का पार्थिव देह लेकर दिल्ली रवाना हो गया है। उन्होंने बताया कि सीओ के अनुसार बुधवार सुबह को सड़क के रास्ते सेना के जवान के शव को लेकर घर पहुंचेंगे। शहीद देव बहादुर की अंत्येष्टि कनकपुर और राघवनगर के मध्य बने श्मशान घाट पर होगी। 

Uttarakhand Soldiers Martyr In Ladakh: Parents and friends with for dead body from three days
- फोटो : अमर उजाला
जिंदादिल देव बहादुर के दोस्तों की लंबी फेहरिस्त है लेकिन कुछ दोस्तों ने उसके साथ बिताए पलों को साझा किया। गौरीकला निवासी अशोक कुमार ने बताया कि देव बहादुर (घर का नाम करन) उम्र में उनसे छोटा था। वह देव को मित्र के साथ छोटा भाई भी मानते थे। वह शुरू से ही हम लोगों को देश प्रेम के लिए प्रोत्साहित करते रहे। जब छुट्टियों में आते थे तो युवाओं के साथ ज्यादा समय बिताते थे। उनके साथ खेलना, शिक्षा को आगे बढ़ाने सहित कई सुझाव भी देते थे। देव को फोटोग्राफी का भी काफी शौक था। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Uttarakhand Soldiers Martyr In Ladakh: Parents and friends with for dead body from three days
- फोटो : अमर उजाला

गौरीकला गांव के ही दुर्गेश वर्मा ने बताया कि देव से मेरी बचपन से दोस्ती थी। वह मित्र के साथ मेरा पथ प्रदर्शक भी रहा। घटना के 15 दिन पूर्व मेरी बात उनके जन्मदिन पर हुई थी। तब देव ने घर आकर सभी दोस्तों को पार्टी देने की बात कही थी। मेरा दोस्त हमें अकेला छोड़कर चला गया। उसकी कमी जिंदगी भर खलेगी। वहीं, अजय कुमार ने बताया कि देव अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करते थे। छुट्टियों में आकर नई जगहों पर यार दोस्तों को घुमाना उनकी आदत थी। 

विज्ञापन
Uttarakhand Soldiers Martyr In Ladakh: Parents and friends with for dead body from three days
- फोटो : अमर उजाला

उन्होंने कहा कि देव जैसे दोस्त को खोकर हमने सब कुछ खो दिया है। रामपाल यादव कहते हैं कि देव मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में था। शांत स्वभाव के कारण उसका किसी से विवाद नहीं होता था। कहा कि वे लोग बचपन से ही गांव की गलियों में खेलकूद कर बड़े हुए। बचपन की शरारतें, खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी और मनोरंजक यादें कभी नहीं भूलेंगी। उसकी यादें हमेशा हमें रुलाती रहेंगी।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed