कोरोना संक्रमण की दर कम होने के साथ दिल्ली में कुतुब मीनार तो उत्तर प्रदेश में ताजमहल सैलानियों के खोल दिए गए। लेकिन पर्यटन राज्य उत्तराखंड के दरवाजे अब भी पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह से नहीं खुले हैं। देवभूमि में आने के लिए अब भी कोविड कर्फ्यू के बंधन हैं।
उत्तराखंड : पर्यटन पर कोरोना कर्फ्यू और आरटीपीसीआर जांच की बंदिशें दे रहीं गहरी चोट
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प्रदेश सरकार ने होटल और रेस्टोरेंट तो खोल दिए, लेकिन राज्य के अधिकांश पर्यटक स्थलों को पर्यटकों के लिए नहीं खोला गया है। मसूरी का कैंपटी फॉल, कंपनी गार्डन, देहरादून में एफआईआर, सहस्त्रधारा, गुच्चु पानी व अन्य सैरगाहों में अब भी रोक-टोक है। जबकि पड़ोसी राज्य हिमाचल, उत्तरप्रदेश और दिल्ली ने अपने कई मशहूर पर्यटक स्थल सैलानियों के खोल दिए हैं। कोविड कर्फ्यू के दौरान राज्य सरकार ने पांच दिन बाजार खोलने का फैसला किया। सप्ताह में शनिवार और रविवार को बाजार नहीं खुलेगा। पर्यटन व्यवसायियों का कहना है कि इन्हीं दो दिनों में पर्यटकों के पास सैर-सपाटा करने की फुरसत होती है। इसी दिन बाजार बंद रखे गए हैं। ऐसे में पर्यटक क्यों आएंगे?
राज्य सरकार को पर्यटक स्थलों के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पर्यटक स्थलों को खोले बिना होटल-रेस्टोरेंट खोलने का कोई फायदा नहीं हैं। ज्यादा पर्यटक वीकेंड (शनिवार-रविवार) को आते हैं। लेकिन प्रदेश सरकार ने कोविड कर्फ्यू के दौरान इन दोनों दिन बाजार बंद रखने का फैसला किया है। सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक आएं।
- संदीप साहनी, अध्यक्ष, उत्तराखंड होटल एसोसिएश
ग्रामीण क्षेत्रों की सैरगाहों में कोई पाबंदी नहीं हैं। वहां जिलाधिकारी को फैसला लेने के अधिकार दिए गए हैं। प्रदेश सरकार चरणबद्ध ढंग से अनलॉक की ओर जा रही है। कोरोना की दूसरी लहर में हिमाचल राज्य कोरोना से उत्तराखंड जितना प्रभावित नहीं रहा। हमारे लिए लोगों के जीवन सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। सरकार को सैकड़ों करोड़ के राजस्व की हानि हुई है। पर्यटन व्यवसाय को भारी नुकसान पहुंचा है। इस नुकसान उबरने के लिए सरकार हर संभव सहयोग कर रही है।
- सुबोध उनियाल, शासकीय प्रवक्ता, उत्तराखंड सरकार
कोविड 19 महामारी ने उत्तराखंड के पर्यटन कारोबार की कमर तोड़ दी है। 2019 में चारधाम यात्रा पर 34 लाख यात्री आए थे। कोरोना की पहली लहर के बाद यात्रियों की संख्या घटकर 3.33 लाख रह गई। यात्रियों की संख्या में 90 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।