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उत्तराखंड : पर्यटन पर कोरोना कर्फ्यू और आरटीपीसीआर जांच की बंदिशें दे रहीं गहरी चोट

Wed, 23 Jun 2021 12:25 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 23 Jun 2021 12:25 PM IST
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Uttarakhand news: weekly corona curfew and RTPCR test restrictions hurt uttarakhand economy
नैनीताल में पर्यटक - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

कोरोना संक्रमण की दर कम होने के साथ दिल्ली में कुतुब मीनार तो उत्तर प्रदेश में ताजमहल सैलानियों के खोल दिए गए। लेकिन पर्यटन राज्य उत्तराखंड के दरवाजे अब भी पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह से नहीं खुले हैं। देवभूमि में आने के लिए अब भी कोविड कर्फ्यू के बंधन हैं।



सप्ताहांत कर्फ्यू, आरटीपीसीआर जांच की अनिवार्यता और मशहूर टूरिस्ट प्वाइंट्स बंद होने से पर्यटन कारोबार को भारी नुकसान पहुंच रहा है। राज्य में पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारियों के तो रोटी के लाले पड़े हैं। बड़े कारोबारियों की हालत भी पतली है। ऐसे में मांग लगातार बढ़ रही है कि पूरे प्रदेश के पर्यटन स्थल पड़ोसी राज्य हिमाचल और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर खोले जाएं। 

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण की दर में लगातार कमी आ रही है। 14 जून से 20 जून के मध्य संक्रमण दर 1.13 प्रतिशत रह गई। कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित रहे देहरादून जिले की संक्रमण 1.27, नैनीताल की 1.35 प्रतिशत रही। सैरगाहों के लिए प्रसिद्ध जिले पौड़ी, हरिद्वार, चमोली और बागेश्वर में संक्रमण दर शून्य से नीचे पहुंच चुकी है।

राज्य में कोरोना के मामले कम होने से प्रदेश सरकार ने कोविड कर्फ्यू में ढील देते हुए होटल और रेस्टोरेंट खोलने की अनुमति दी। लेकिन राज्य के पर्यटन व्यवसाय को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। राज्य से बाहर के पर्यटकों के लिए आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट की शर्त बनी हुई है। उधर, हिमाचल ने कोविड जांच की निगेटिव की रिपोर्ट की शर्त हटा दी। नतीजा यह है कि पड़ोसी राज्य के पर्यटक स्थल शिमला, मनाली, डलहौजी, धर्मशाला में सैलानियों की भीड़ उमड़ रही है। उत्तराखंड में सन्नाटा है।

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शिमला में सैलानियों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

प्रदेश सरकार ने होटल और रेस्टोरेंट तो खोल दिए, लेकिन राज्य के अधिकांश पर्यटक स्थलों को पर्यटकों के लिए नहीं खोला गया है। मसूरी का कैंपटी फॉल, कंपनी गार्डन, देहरादून में एफआईआर, सहस्त्रधारा, गुच्चु पानी व अन्य सैरगाहों में अब भी रोक-टोक है। जबकि पड़ोसी राज्य हिमाचल, उत्तरप्रदेश और दिल्ली ने अपने कई मशहूर पर्यटक स्थल सैलानियों के खोल दिए हैं। कोविड कर्फ्यू के दौरान राज्य सरकार ने पांच दिन बाजार खोलने का फैसला किया। सप्ताह में शनिवार और रविवार को बाजार नहीं खुलेगा। पर्यटन व्यवसायियों का कहना है कि इन्हीं दो दिनों में पर्यटकों के पास सैर-सपाटा करने की फुरसत होती है। इसी दिन बाजार बंद रखे गए हैं। ऐसे में पर्यटक क्यों आएंगे?

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मसूरी में पर्यटक - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

राज्य सरकार को पर्यटक स्थलों के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पर्यटक स्थलों को खोले बिना होटल-रेस्टोरेंट खोलने का कोई फायदा नहीं हैं। ज्यादा पर्यटक वीकेंड (शनिवार-रविवार) को आते हैं। लेकिन प्रदेश सरकार ने कोविड कर्फ्यू के दौरान इन दोनों दिन बाजार बंद रखने का फैसला किया है। सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक आएं।
- संदीप साहनी, अध्यक्ष, उत्तराखंड होटल एसोसिएश

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सुबोध उनियाल, शासकीय प्रवक्ता, उत्तराखंड सरकार - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

ग्रामीण क्षेत्रों की सैरगाहों में कोई पाबंदी नहीं हैं। वहां जिलाधिकारी को फैसला लेने के अधिकार दिए गए हैं। प्रदेश सरकार चरणबद्ध ढंग से अनलॉक की ओर जा रही है। कोरोना की दूसरी लहर में हिमाचल राज्य कोरोना से उत्तराखंड जितना प्रभावित नहीं रहा। हमारे लिए लोगों के जीवन सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। सरकार को सैकड़ों करोड़ के राजस्व की हानि हुई है। पर्यटन व्यवसाय को भारी नुकसान पहुंचा है। इस नुकसान उबरने के लिए सरकार हर संभव सहयोग कर रही है।
- सुबोध उनियाल, शासकीय प्रवक्ता, उत्तराखंड सरकार

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चारधाम यात्रा - फोटो : एएनआई

कोविड 19 महामारी ने उत्तराखंड के पर्यटन कारोबार की कमर तोड़ दी है। 2019 में चारधाम यात्रा पर 34 लाख यात्री आए थे। कोरोना की पहली लहर के बाद यात्रियों की संख्या घटकर 3.33 लाख रह गई। यात्रियों की संख्या में 90 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। 

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