अरुणाचल प्रदेश में शहीद हुए उत्तराखंड में कुमाऊं रेजीमेंट के हवलदार मुकेश कुमार चार अप्रैल 2021 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। शहीद मुकेश के बेटे विशाल ने बताया कि तीन जनवरी से उनका अवकाश स्वीकृत हो गया था। वे रिटायरमेंट से पहले नए साल में घर आने वाले थे।
बेटे विशाल ने कहा कि अपनी 24 साल की नौकरी में शहीद मुकेश इस वर्ष पहली बार अप्रैल में तीन महीने की छुट्टी आए थे। इससे पहले उन्हें इतनी लंबी छुट्टी कभी नही मिली। सेवानिवृत्ति को लेकर मुकेश खुद भी उत्साहित थे। वे कई बार कह चुके थे कि सेवानिवृत्ति के बाद वे अपने परिवार और रिश्तेदारों को समय दे सकेंगे।
मुकेश का इरादा सेवानिवृत्त होने के बाद अपना कारोबार करने का था। मुकेश की इच्छा थी कि उनके दोनों बेटे बेहतर शिक्षा ग्रहण कर प्रशासनिक सेवा में जाकर देश सेवा करें। उनके पिता ओमप्रकाश भी फौज में थे। वे रानीखेत कैंट छावनी से सेवानिवृत्त हुए थे। तीन साल पहले मुकेश के पिता का निधन हुआ था।
जनपद मुरादाबाद थाना डिलारी के ग्राम गक्खरपुर निवासी मुकेश कुमार (38) पुत्र स्व. ओमप्रकाश की भर्ती 15 मार्च 1995 को 9 कुमाऊं रेजीमेंट में हुई थी। वर्तमान में मुकेश, 9 कुमाऊं रेजीमेंट में हवलदार के पद पर तैनात थे। इससे पूर्व उनकी तैनाती मध्यप्रदेश, पुरी, दिल्ली, मुंबई, जम्मू कश्मीर, सियाचिन, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा में भी हो चुकी थी।
पिछले तीन वर्षों से मुकेश अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी केमाग जिले के बोमडिला की आरआर हिल्स पोस्ट पर तैनात थे। 12 दिसंबर की रात मुकेश और उसके साथी जवान दोमंजिला बैरक में थे। 13 दिसंबर की तड़के शार्ट सर्किट से बैरक में भीषण आग लग गई। आग में फंसने से हवलदार मुकेश की मौत हो गई।