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उत्तराखंड की सियासी उथल-पुथल में मार्च की भी चर्चा, पूर्व से ही इसी माह में सामने आती रही है उठापटक

Wed, 10 Mar 2021 09:58 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 10 Mar 2021 09:58 AM IST
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uttarakhand govt crisis cm trivendra rawat resignation news : march month discussion also in Uttarakhand politics
त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे से पहले राज्य में मचे सियासी उथल-पुथल के बीच दिल्ली से लेकर राज्य तक बैठकें चल रही हैं। इन सबके बीच उत्तराखंड में मार्च की भी चर्चा हो रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मार्च में राज्य में पहले भी इस महीने में कई बार सियासी उथल-पुथल देखने को मिली है।  2017 में प्रचंड बहुमत के साथ आई त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार को कई बार राजनीतिक हलचल का सामना करना पड़ा। इससे पहले मार्च 2016 में भी हरीश रावत सरकार को गिराने का प्रयास किया गया था। फिर पिछले साल मार्च में ही विधायकों के एक समूह ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ विद्रोह किया था। फिर, पिछले साल मार्च में सीएम त्रिवेंद्र ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर सबको आश्चर्य में डाल दिया, जिसके बाद हिमालयी राज्य में राजनीतिक बवाल मच गया है। इस साल भी यह मार्च का महीना ही है कि सीएम ने बजट सत्र के दौरान गैरसैंण को तीसरा मंडल घोषित कर दिया। इस मंडल में कुमाऊं और गढ़वाल के दो दो जिलों को सम्मिलित किया गया है। चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिलों को इस मंडल में सम्मिलित किया जाएगा। सीएम ने कहा कि गैरसैण में कमिश्नर और डीआईजी स्तर के अधिकारी बैठेंगे।

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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश में भाजपा सरकार के नेतृत्व परिवर्तन के साथ हरिद्वार जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जिले में भाजपा के आठ विधायक हैं। विधायक भी दो खेमों में बंटे हैं। मुखिया बदलने के बाद कुछ विधायक एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। विधायकों में नए मुख्यमंत्री की कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद जग गई है। विधायकों ने इसके लिए लॉबिंग भी शुरू कर दी है। 

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मदन कौशिक - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

उत्तराखंड की राजनीति में हरिद्वार जिला हमेशा सुर्खियों में रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को 2017 के चुनाव में हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से मुंह की खानी पड़ी है। हरीश रावत को हराने वाले भाजपा विधायक स्वामी यतीश्वरानंद त्रिवेंद्र की मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना पाए। जबकि हरिद्वार शहर से भाजपा विधायक मदन कौशिक त्रिवेंद्र सरकार में सबसे मजबूत स्तंभ रहे।

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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला

आठ विधायक होने के बाद भी मात्र मदन कौशिक ही त्रिवेंद्र सरकार की कैबिनेट के रत्नों में शामिल रहे। विधायकों में कई बार त्रिवेंद्र सरकार के खिलाफ बगावत के स्वर मुखर हुए। लेकिन सियासी दांवपेच से त्रिवेंद्र सरकार ने असंतुष्ट विधायकों के एक धड़े को शांत कर दिया।

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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : ANI

जबकि दूसरा धड़ा भाजपा के एक मजबूत नेता के साथ खड़ा हो गया। इससे भाजपा के विधायक आपस में ही दो गुटों में बंट गए। पार्टी के कार्यक्रमों में गुटबाजी अक्सर देखने को मिलती रही है। 2022 चुनाव से ठीक पहले नेतृत्व परिवर्तन होने से असंतुष्ट विधायक फिर सक्रिय हो गए हैं। 

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