उत्तराखंड के ऋषिगंगा की आपदा में लापता लोगों को तलाशने का अभियान तपोवन और रैणी क्षेत्र में 23वें दिन भी जारी रहा। तपोवन सुरंग में बचाव कर्मियों ने टनल के टी प्वाइंट तक मलबे को हटा दिया है। यहां से मुख्य टनल तक पहुंचने के लिए 250 मीटर और आगे जाना होगा, लेकिन टनल के मुख्य द्वार से ही अंदर मलबे के ढेर लगे हैं। वहीं सुरंग के अंदर से लगातार पानी आने से मलबा साफ करने में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
चमोली में आपदा के 23वें दिन तक तपोवन सुरंग से 189 मीटर तक मलबा हटा लिया गया है। यहां पर टनल का टी प्वाइंट है। एनटीपीसी के महाप्रबंधक आरपी अहिरवार का कहना है कि इस टी प्वाइंट से दाहिनी तरफ एसएफटी (सिल्ट फ्लशिंग टनल) एडिट टनल है, जबकि दूसरी तरफ इंटेक टनल है। इंटेक टनल से मुख्य सुरंग की दूरी 250 मीटर है। दोनों सुरंगों में भारी मात्रा में मलबा और पानी भरा है। पंप से पानी निकाला जा रहा है। इसके बाद से लगातार मलबा हटाने का काम किया जा रहा है।
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तपोवन सुरंग के अंदर टी प्वाइंट
- फोटो : अमर उजाला
सुरंग के अंदर बड़ी मशीनों से काम नहीं हो पा रहा है जिससे समय लग रहा है। वहीं आपदा के 23 दिन बाद भी तपोवन और रैणी गांव के पास रेस्क्यू अभियान जारी है।रविवार और सोमवार को कोई शव नहीं मिला है।
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तपोवन सुरंग के अंदर टी प्वाइंट
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अभी तक मिलने वाले शवों की संख्या 72 है, जबकि 133 लापता हैं। वहीं, सामाजिक संगठन कासा और जनदेश कल्प क्षेत्र भरकी उर्गम घाटी की ओर से तपोवन आपदा प्रभावित क्षेत्र में 126 प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की गई।
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तपोवन सुरंग के अंदर टी प्वाइंट
- फोटो : अमर उजाला
भंग्यूल गांव के 98 और करछों गांव के 28 परिवारों को राहत सामग्री के रूप में 10-10 किलोग्राम चावल व आटा, दो किग्रा दाल के साथ नमक, चीनी, तेल, सोलर लाइट और बिस्किट के पैकेट भी वितरित किए गए।
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तपोवन सुरंग के अंदर टी प्वाइंट
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ग्रुप की समन्वयक कुसुम घड़ियाल, कार्यक्रम ऑफिसर वीरेंद्र प्रसाद वशिष्ठ, जनदेश सामाजिक संस्था की हेमा पंवार, कलावती शाह, देवेंद्र रावत, रघुबीर चौहान और लक्ष्मण सिंह नेगी ने राहत सामग्री दी।