देहरादून में विधानसभा सत्र के दौरान ‘रोजगार दो या गद्दी छोड़ दो’ कार्यक्रम के तहत युवा कांग्रेस ने सोमवार को विधानसभा कूच कर केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेस के विधानसभा कूच को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी समर्थन दिया और प्रदर्शन में शामिल हुए।
यहां कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हमारा विकास मॉडल मोदी मॉडल नहीं है। इसमें केवल अडानी और अंबानी की दौलत सैकड़ों गुना बढ़ी है। मोदी मॉडल में रोजगार सिकुड़ने के साथ काम छीना जा रहा है। हमारा मॉडल सोनिया गांधी, मनमोहन और राहुल गांधी मॉडल हैं। इसके अंदर रिक्त पद भरे जाते हैं और सरकारी पद सृजित किए जाते हैं। जो पढ़े लिखे नहीं है उनके लिए मनरेगा जैसी योजना चलाई जाती है।
प्रदर्शनकारियों को विधानसभा जाने से रोकने के लिए रिस्पना पुल से पहले भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। सबसे आगे पीपीई किट पहने एक पुलिसकर्मी की हालत बिगड़ गई। एंबुलेंस की सहायता से पुलिसकर्मी को अस्पताल पहुंचाया गया। रिस्पना पुल से पहले नारेबाजी कर बीजेपी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे कांग्रेसियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और पुलिसलाइन में ले जाकर रिहा कर दिया। इस दौरान कुछ देर तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्कामुक्की भी हुई।
हरीश रावत ने कहा कि रोजगार के अवसर पैदा करने और नौकरी देने में कांग्रेस का रिकार्ड रहा है। युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने हमें नई ऊर्जा देने का काम किया है। भगवान, किसान और देश के नौजवानों को कोई नहीं हरा सकता। युवाओं को आगे लाने के लिए कांग्रेस हमेशा प्रयास करेगी। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने कहा कि बीते पांच साल से सरकार ने युवाओं को नजरअंदाज करने का काम किया है। दिनों दिन प्रदेश में बेरोजगारी और महंगाई बढ़ रही है। इसके लिए सिर्फ बीजेपी सरकार जिम्मेदार है।
चुनाव के समय वादे करने वाली सरकार ने युवाओं के साथ धोखा किया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि बीजेपी सरकार ने उत्तराखंड को ही नहीं देश को भी सिर्फ घाव देने का काम किया है। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास ने कहा कि केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार चुनाव से पहले बड़े-बडे़ वादे वादे करती है। नोटबंदी और जीएसटी के दौरान बीजेपी सरकार ने 12 करोड़ की नौकरी छीनने का काम किया है। इस दौरान कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।