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इसी पिच पर टूटे बल्ले और कपड़े की गेंद से सीखा क्रिकेट, आज छुड़ा रहा बड़े-बड़े धुरंधरों के पसीने

Mon, 05 Feb 2018 06:16 PM IST
भक्त दर्शन पांडेय/अमर उजाला, बागेश्वर
भक्त दर्शन पांडेय/अमर उजाला, बागेश्वर Updated Mon, 05 Feb 2018 06:16 PM IST
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Under 19 world cup kamlesh nagarkoti untold story
kamlesh
आस्ट्रेलिया को हराकर विश्वविजेता बनी भारतीय टीम का यह खिलाड़ी छोटा पैकेट बड़े धमाके से कम नहीं है। टूटे बल्ले और कपड़े की गेंद से क्रिकेट सीखकर आज यह खिलाड़ी बड़े-बड़े धुरंधरों को मात दे रहा है।


 
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हम बात कर रहे हैं 18 साल के कमलेश नगरकोटी की, जिसने फाइनल में आस्ट्रेलिया के कप्तान समेत दो खिलाड़ियों को पवेलियन की राह दिखाकर भारत की जीत का मार्ग प्रशस्त किया। 149 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले अपने इस लाल की कामयाबी पर घरवालों को उसका बजपन याद गया। कैसे वह घर के उबड़-खाबड़ आंगन में लकड़ी का बल्ला और कपड़े की गेंद से हर समय क्रिकेट खेलता रहता था और कई बार तो उसे डांट भी पड़ती थी।

 
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kamlesh house
अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में तेज रफ्तार गेंदबाजी से बल्लेबाजों को पसीना छुड़ाने वाले कमलेश बागेश्वर के भरसीला गांव के रहने वाले हैं। राजस्थान की ओर से क्रिकेट खेलते हुए कमलेश ने अंडर-19 विश्वकप टीम में जगह बनाई और अपनी तेज गेंदबाजी और प्रदर्शन की बदौलत आईपीएल में भी उनकी बोली करोड़ों में छूटी और वह केकेआर टीम का हिस्सा बने। पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ से लेकर सचिन और द्रविड़ तक ने उनकी शान में ट्विटर पर कसीदे गढ़े।

 
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बीते वर्ष इंग्लैंड में आयोजित यूथ टेस्ट में भी उन्होंने एक मैच की दोनों पारियों में 10 विकेट चटकाए। इससे पहले विजय हजारे ट्रॉफी में हैट्रिक भी लगा चुके हैं। उनकी कामयाबी की कहानी जानने के लिए अमर उजाला संवाददाता शनिवार सुबह उनके घर पहुंचे। घर पर कई लोगों के साथ 87 वर्षीय आमा भी बैठी थीं। वह बार-बार अपने बेटे पूरन सिंह नगरकोटी से एक ही बात पूछ रही थी ‘टीवी पर कब देखेलो मेरा बिट्टू’ (मेरा बिट्टू टीपी पर कब नजर आएगा)। पूछने पर पता चला कि यह आमा कमलेश की दादी हैं।

 
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कमलेश ने जैसे ही गेंदबाज ईशान की गेंद पर एडवर्ड का कैच पकड़ा तो पूरा कमरा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस दौरान कमलेश के बारे में बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो साड़ी के आंचल से बार-बार अपने खुशी के आंसू पोंछती दादी रमुली देवी को उसका बचपन याद आ गया। दादी ने बताया कि बिट्टू कभी-कभी घर के भीतर क्रिकेट खेलने लग जाता था।

 
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