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दिवाली: सांस के मरीज बरतें विशेष सावधानी, धुएं के संपर्क में आने से फेफड़ों को पहुंच सकता है नुकसान

Sun, 08 Nov 2026 11:14 AM IST
Alka Tyagi माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 08 Nov 2026 11:14 AM IST
सार

पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कण फेफड़ों में सूजन और जलन पैदा कर सकते हैं। पहले से सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों में यह स्थिति अस्थमा का दौरा पड़ने या बीमारी के लक्षण गंभीर होने का कारण बन सकती है।

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Diwali 2026 Asthma and respiratory patients should exercise extra caution  Today
पटाखों का धुआं हो सकता है खतरनाक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दीपावली पर आतिशबाजी का शोर और रंगीन रोशनी भले ही उत्सव का उत्साह बढ़ाते हों लेकिन पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं सांस के मरीजों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है। पटाखों के जलने से हवा में बारीक धूल कण (पीएम 2.5 और पीएम 10), सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें घुल जाती हैं।

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ये प्रदूषक सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचकर श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं। इससे अस्थमा, सीओपीडी और एलर्जी से पीड़ित मरीजों को सांस लेने में परेशानी, खांसी, सीने में जकड़न और दम घुटने जैसी शिकायत हो सकती है।
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विशेषज्ञों के अनुसार पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कण फेफड़ों में सूजन और जलन पैदा कर सकते हैं। पहले से सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों में यह स्थिति अस्थमा का दौरा पड़ने या बीमारी के लक्षण गंभीर होने का कारण बन सकती है। कई बार स्वस्थ लोगों को भी धुएं के संपर्क में आने से आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इसका असर केवल कुछ घंटों तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि अधिक प्रदूषण के संपर्क में आने से लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव भी सामने आ सकते हैं।
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क्या करें

अस्थमा और सीओपीडी के मरीज दीपावली पर पटाखों के धुएं से दूर रहें। घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें, विशेषकर जब बाहर धुआं अधिक हो। डॉक्टर की सलाह के अनुसार निर्धारित दवाएं और इनहेलर अपने पास रखें। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला एन-95 मास्क पहनें। हालांकि यह गैसों से पूरी सुरक्षा नहीं देता। सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत स्वच्छ हवा वाली जगह पर जाएं और चिकित्सकीय सहायता लें। घर में धुआं और धूल जमा न होने दें। बच्चे भी बड़ों की निगरानी में पटाखे जलाएं।

क्या न करें-

सांस के मरीज पटाखे जलाने या उनके आसपास खड़े होने से बचें। धुएं से भरे स्थान पर टहलने या व्यायाम करने न जाएं। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद न करें। सांस फूलने या सीने में जकड़न को सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें।

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तेज आवाज से कानों को भी खतरा

देहरादून। दीपावली पर तेज आवाज वाले पटाखे कानों के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। अत्यधिक ध्वनि से कान के पर्दे, सुनने की क्षमता और आंतरिक कान की संवेदनशील कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। तेज धमाके से कुछ मामलों में कान का पर्दा तक फट सकता है। इससे सुनाई कम देना, कान में घंटी बजना और दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दून अस्पताल में हर दीपावली पर तेज आवाज से कान संबंधी परेशानी के करीब 15 से 20 मामले इमरजेंसी में पहुंचते हैं। कई बार इसका दुष्प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए तेज आवाज वाले पटाखों से दूरी रखें, बच्चों को इनके पास न जाने दें और कानों की सुरक्षा का ध्यान रखें।

पटाखों से कान-आंख को तो नुकसान हो ही सकता है लेकिन इनके साथ ही अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को दिक्कत होती है। इनके मरीजों को बहुत ध्यान रखने की जरूरत है।
- डॉ. आरएस बिष्ट, चिकित्साधीक्षक दून अस्पताल

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