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नवरात्रि 2021: यहां शिव के साथ होती है शक्ति की उपासना, स्थापित है देवी स्वरूप शक्तिस्तंभ, तस्वीरें

Thu, 07 Oct 2021 03:41 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अजय कुमार , अमर उजाला, उत्तरकाशी
अजय कुमार , अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 07 Oct 2021 03:41 PM IST
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Shardiya Navratri 2021: Here Shakti is worshiped with Shiva, Shaktistambh is established
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी - फोटो : अमर उजाला

उत्तरकाशी में प्राचीन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में शिव के साथ शक्ति की उपासना भी होती है। नवरात्रि में विशेष रुप से श्रद्धालु देवी स्वरूप शक्ति स्तंभ (त्रिशूल) की पूजा-अर्चना और चुनरी चढ़ाने के लिए यहां दूर-दूर से पहुंचते हैं। इसे 51 शक्तिपीठों में सर्वोपरि माना गया है।शहर के मध्य में स्थित प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में एक चबूतरे पर गर्भगृह में 56 सेमी. ऊंचा शिवलिंग प्रतिष्ठापित है, वहीं मंदिर के ठीक सामने प्रांगण में शक्ति माता का मंदिर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवासुर संग्राम के दौरान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने इस शक्ति का निर्माण किया, जिससे देवताओं ने राक्षसों का अंत किया। त्रिशूल रूपी इस शक्ति स्तंभ की ऊंचाई 21 फुट है। जमीन के अंदर यह कितनी गहराई तक है, यह जानने के लिए खोदाई भी की गई, लेकिन अभी भी यह रहस्य बना हुआ है। वर्ष 1808 में अंग्रेज रीपर ने अपने एक लेख में लिखा है कि वर्ष 1803 के भूकंप में मंदिर ढह गया था, लेकिन यह शक्ति स्तंभ सुरक्षित रहा।

Shardiya Navratri 2021: Here Shakti is worshiped with Shiva, Shaktistambh is established
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी - फोटो : अमर उजाला

प्रसिद्ध साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन ने अपनी पुस्तक हिमालय परिचय में इस शक्ति स्तंभ को गढ़वाल की सबसे पुरातात्विक कृति बताया है। शक्तिस्तंभ के बारे में मान्यता है कि जब भी कोई श्रद्धाभाव के साथ इसे छूता है तो उसे कंपन महसूस होता है। मंदिर के मुख्य पुजारी बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि अनादिकाल से विराजमान यह शक्तिस्तंभ पाताल लोक में शेषनाग के सिर पर टिका हुआ है। इसी कारण जब कोई से श्रद्धा भाव से इसे छूता है तो उसे एक कंपन महसूस होता है।

Shardiya Navratri 2021: Here Shakti is worshiped with Shiva, Shaktistambh is established
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी - फोटो : अमर उजाला

मुख्य पुजारी मुरारीलाल भट्ट बताते हैं कि आज से 1500 वर्ष पूर्व एक मूर्ति विध्वंसक दल मंदिरों को तोड़ने और मूर्तियों को खंडित करने निकला था, जो यहां भी आया। उसने इस शक्ति स्तंभ को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह नाकाम रहा। इसके निशां आज भी स्तंभ पर मौजूद हैं। 

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Shardiya Navratri 2021: Here Shakti is worshiped with Shiva, Shaktistambh is established
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी - फोटो : अमर उजाला

शिव और शक्ति जगत के माता-पिता माने जाते हैं, जिनके बिना यह सृष्टि अधूरी है। राज्य के 51 शक्तिपीठों में यह सर्वोपरि माना गया है।
-आचार्य मुरारीलाल भट्ट, मुख्य पुजारी शक्तिमाता मंदिर

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Shardiya Navratri 2021: Here Shakti is worshiped with Shiva, Shaktistambh is established
काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी - फोटो : सोशल मीडिया

राज्य ही नहीं देशभर में ऐसे बहुत कम मंदिर हैं, जहां शिव और शक्ति दोनों की पूजा एक साथ होती है। यह अपने आप में एक अद्भुत संयोग है।
 -अजय पुरी, महंत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

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