जनपद पौड़ी ने उत्तराखंड को पांच मुख्यमंत्री दिए, लेकिन कोई भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पांचों पूर्व मुख्यमंत्रियों में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री का पदभार संभाला।
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इसके बाद बीसी खंडूड़ी, डा. रमेश पोखरियाल निशंक व विजय बहुगुणा ने मुख्यमंत्री का दायित्व निभाया। निवर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड में सबसे कम समय के लिए सीएम पद की जिम्मेदारी संभाली।
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जनपद पौड़ी ने पांच मुख्यमंत्री दिए हैं। इनमें सबसे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी ने दो बार मुख्यमंत्री का पदभार संभाला। जनरल खंडूड़ी 8 मार्च 2007 से 23 जून 2009 और 11 सितंबर 2011 से 13 मार्च 2012 तक मुख्यमंत्री रहे। पूर्व सीएम खंडूड़ी पौड़ी ब्लाक के राधा बल्लभपुरम के मूल निवासी हैं।
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डा. रमेश पोखरियाल निशंक
- फोटो : सोशल मीडिया
केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने 24 जून 2009 से 10 सितंबर 2011 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। डा. निशंक जिले के विकास खंड पाबौ के पिनानी गांव के रहने वाले हैं।
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विजय बहुगुणा
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विकास खंड खिर्सू स्थित ग्राम पंचायत देवलगढ़ के बुघाणी गांव के मूल निवासी विजय बहुगुणा 14 मार्च 2012 से 31 जनवरी 2014 तक मुख्यमंत्री रहे। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत खैरासैण गांव के रहने वाले हैं। त्रिवेंद्र 18 मार्च 2017 से 09 मार्च 2021 तक मुख्यमंत्री रहे।
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तीरथ सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
जबकि निवर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत प्रदेश में सबसे कम समय के लिए सीएम पद की जिम्मेदारी संभालने वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं। वे 10 मार्च 2021 से 4 जुलाई 2021 तक मुख्यमंत्री रहे। तीरथ जिले के विकास खंड कल्जीखाल के सीरों गांव के रहने वाले हैं। वे गढ़वाल सीट से सांसद हैं।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा कि युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में 2022 चुनाव में 60 से अधिक सीटें लाकर पार्टी बड़ी जीत दर्ज करेगी। कौशिक ने कहा कि भाजपा ने साढ़े चार साल में विकास कार्यों के बूते यह साबित भी किया है कि भाजपा ही विकास के प्रति समर्पित पार्टी है और उसकी सोच सकारात्मक है। सांविधानिक संकट के चलते नेतृत्व परिवर्तन करना पड़ा। लेकिन भाजपा ऐसी पार्टी है जहां इसका विकास कार्यों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। राज्य के विकास कार्य निर्वाध गति से चल रहे हैं।