हरिद्वार में एसएमजेएन पीजी कॉलेज में छात्र ओपन चुनाव (कॉलेज के हर छात्र को वोट देने का अधिकार) कराए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तोड़फोड़ की। इसके चलते पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठी चार्ज कर दिया। इसमें पदाधिकारी सहित कई कार्यकर्ता घायल हो गए। पूरे मामले को लेकर एबीवीपी कार्यकर्ता देर शाम तक देवपुरा कार्यालय पर विचार विर्माश करते रहे।
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एबीवीपी कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को करीब 11 बजे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता एसएमजेएन कॉलेज में पहुंचे। यहां पर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं और कॉलेज छात्रों ने ओपन चुनाव की मांग लेकर जमकर नारेबाजी की और कॉलेज के प्राचार्य का पुतला फूंका। आरोप है कि इसी बीच कुछ छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। तोड़फोड़ की सूचना पर ज्वालापुर कोतवाली पुलिस कॉलेज में पहुंची। पुलिस ने हंगामा कर रहे एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर लाठी चार्ज करते हुए कॉलेज से बाहर निकाला।
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एबीवीपी कार्यकर्ता
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पुलिस की कार्यवाई में आदर्श कश्यप के सिर पर चोट लगी, जबकि पुलिस से धक्का मुक्की में संगठन मंत्री राहुल सारस्वत के कपड़े फट गए। इसके साथ ही नगर मंत्री करन वर्मा, नवजोत वालिया, दक्ष शर्मा, शिवांग चौहान, तरुण चौहान आदि कार्यकर्ता भी चोटिल हो गए। इसके बाद परिषद कार्यकर्ताओं ने ज्वालापुर कोतवाली पहुंचकर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तहरीर दी। एबीपीपी कार्यकर्ताओं का आरोप कि पुलिस ने शांतिपूर्ण धरना दे रहे कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया और छात्राओं के अभद्रता की।
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एबीवीपी कार्यकर्ता
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परिषद के संगठन मंत्री राहुल सारस्वत और जिला संयोजक आदित्य गौड़ ने बताया कि यदि तीन दिन के भीतर आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्यवाई नहीं की जाता है तो कोतवाली का घेराव किया जाएगा। एबीवीपी के जिला संयोजक आदित्य गौड़ और नगर मंत्री करण वर्मा ने बताया कि कॉलेज में छात्र कल्याण परिषद के चुनाव को लेकर कक्षा प्रतिनिधि छात्रों के माध्यम से चुनाव कराया जाता है।
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एबीवीपी कार्यकर्ता
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कॉलेज में यह चुनाव प्रक्रिया आचार संहित को प्रभावित करती है। इसका परिषद के कार्यकर्ता विरोध करते आए हैं। इस संबंध में कॉलेज और जिला प्रशासन को कईं बार ज्ञापन दिया गया। इस पर कोई कार्रवाई न होने पर परिषद के कार्यकर्ताओं को बाध्य होकर आंदोलन करना पड़ा।