कारगिल विजय दिवस पर शहीदों के शौर्य और वीर गाथा ने जहां हर शख्स के अंदर देशभक्ति का जुनून भरा, वहीं देश के रणबाकुंरों को याद कर हर आंख से आंसू छलक पड़े। तस्वीरों में देखिए...
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को गांधी पार्क में कारगिल शहीद स्मारक पर शहीदों को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि कारगिल का युद्ध सामरिक दृष्टि से विषम परिस्थितियों में लड़ा गया। इसके बावजूद सैनिकों ने पराक्रम और साहस का परिचय देते हुए अपनी भूमि से दुश्मनों को खदेड़ा।
समारोह में मुख्यमंत्री ने सैनिकों एवं शहीद परिजनों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के लिए राज्य सरकार कृतसंकल्प है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 26 जुलाई 1999 को कारगिल पर विजय प्राप्त कर भारतीय सैन्य शक्ति का परचम लहराया।
उन्होंने कहा कि द्रास, टाईगर हिल, बटालिक में शत्रुओं ने छद्म रूप से घुसकर भारतीय सेना पर वार करना शुरू कर दिया था, लेकिन हमारे सैनिकों ने विपरीत परिस्थितियों में भी पूरे पराक्रम एवं साहस के साथ सुनियोजित तरीके से दुश्मनों को खदेड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वीर सपूतों की शहादत का सम्मान करती है। कारगिल युद्ध में जीओसी-इन-सी रहे लेफ्टिनेंट जनरल ओपी कौशिक ने कहा कि कारगिल युद्ध में राजपूताना रायफल ने सबसे पहले अटैक किया। युद्ध में 525 सैनिक शहीद हुए। इसमें उत्तराखंड से 75 सैनिक थे। ब्रिगेडियर केजी बहल ने कहा कि शहीद के परिजनों के लिए कई घोषणाएं की जाती है, लेकिन इस पर अमल नहीं होता।