पीडीएफ और उत्तराखंड कांग्रेस के बीच जारी जुबानी जंग एक बार फिर दिल्ली दरबार में पहुंच गई है। इस बार पीडीएफ के तेवर सख्त नजर आ रहे हैं। सियासी सूत्रों की मानें तो पीडीएफ नेताओं ने कांग्रेस आलाकमान से मिलकर प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय समेत तमाम पार्टी नेताओं की जुबान पर अंकुश लगाने की मांग की है।
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इतना ही नहीं, सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि पीडीएफ नेताओं ने आलाकमान से साफ तौर पर कह दिया है कि प्रदेश अध्यक्ष समेत तमाम पार्टी नेताओं की ओर से पीडीएफ को लेकर लगातार की जा रही अनाप-शनाप बयानबाजी पर रोक नहीं लगाई गई तो समर्थन वापसी पर भी विचार किया जा सकता है। पीडीएफ नेताओं से कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात के दौरान साफ तौर पर कहा कि उन्होंने 2012 में कांग्रेस सरकार को तमाम राजनीतिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और समझौता होने के बाद समर्थन दिया था। तब से अब तक इसे लगातार जारी रखा है।
हाल फिलहाल में राजनीतिक संकट के दौरान जब सरकार गिर गई और राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया, उस दौरान भी पीडीएफ सरकार के साथ एकजुट रहा। अदालत के आदेश पर हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान भी पीडीएफ एक बार फिर अपने वादे पर खरा उतरा, लेकिन अब कांग्रेस पार्टी की ओर से पीडीएफ की मंशा पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं। वह भी ऐसे वक्त में जबकि विधानसभा चुनाव नजदीक है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष समेत कुछ पार्टी नेताओं की ओर से जिस तरह की बयानबाजी की जा रही है वह न सिर्फ पीडीएफ-कांग्रेस गठबंधन के लिए सियासी तौर पर खतरनाक है, वरन विपक्षी भाजपा भी इसका पूरा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर सकती है। ऐसे में पीडीएफ नेताओं का कहना है कि आलाकमान के स्तर पर बयानबाजी पर रोक लगायी जाए। जहां एक तरफ पीडीएफ नेताओं की केंद्रीय आलाकमान से बैठक की चर्चाएं रहीं।
वहीं, पीडीएफ नेताओं से जब इस संबंध जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने यह तर्क देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि वह तो योजनाओं के संबंध में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने आए हैं। जबकि पीडीएफ नेता और शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार ने कहा कि उन्हें मंत्रियों और साथी नेताओं के दिल्ली जाने की कोई जानकारी नहीं है।