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अब महज फोटो खिंचने से ही बन जाएगा इलेक्ट्रिसिटी बिल, कैसे जानिए...

Wed, 17 Jan 2018 09:13 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 17 Jan 2018 09:13 AM IST
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new technology of making electricity bill
ब‌िल घोटाला - फोटो : अमर उजाला

अब आपके इले​क्ट्रिसिटी बिल प्रक्रिया में बढ़ा बदलाव होने वाला है। जिसके बाद महज फोटो खिंचने से ही बिल तैयार हो जाएगा। कैसे जानिए यहां...


 

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‌‌बिजली मिटर
उत्तराखंड में अब बिजली मीटरों की रीडिंग का काम मोबाइल एप से किया जाएगा। मोबाइल एप में बिजली के मीटर का फोटो खिंचते ही रीडिंग के हिसाब से बिल तैयार हो जाएगा, जिसे मौके पर ही उपभोक्ताओं को दे दिया जाएगा। इसे लेकर उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने मोहाली की कंपनी टीडीएस मैनेजमेंट कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड के साथ करार किया है। प्रथम चरण में इस योजना पर हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जनपद में अमल किया जाएगा।
 
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बिजली का मीटर
यूपीसीएल को प्रदेश के कई शहरों से बिजली की खपत के मुकाबले कम राजस्व मिल रहा है। जांच में यह बात सामने आई थी कि बिजली के कई उपभोक्ताओं का बिल फिक्स कर दिया गया है। उपभोक्ता चाहे जितनी भी बिजली खर्च करे, लेकिन बिल के रूप में वह प्रतिमाह निर्धारित रकम ही जमा करता है। इसके अलावा, कई जगह मीटर रीडिंग में गड़बड़ी की शिकायत सामने आ रही थी। इस समस्या के हल के लिए यूपीसीएल ने मोहाली की कंपनी के साथ करार किया है। इसमें लुधियाना की प्रज्ञावायर इंफोमेटिक्स प्राइवेट भी ज्वाइंट वेंचर (संयुक्त उपक्रम) में साझीदार है। इस योजना पर लगभग 14.12 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।  

 
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money
इस योजना के तहत कंपनी मोबाइल एप के माध्यम बिजली का बिल उपभोक्ताओं को देगी। मोबाइल एप से बिजली के मीटर का फोटो लेते ही सारा डाटा यूपीसीएल के सर्वर में चला जाएगा। रीडिंग के हिसाब से बिल खुद-ब-खुद तैयार हो जाएगा। उपभोक्ताओं को मौके पर ही बिजली के बिल दे दिए जाएंगे। प्रथम चरण में इस योजना को हरिद्वार, ज्वालापुर, लंढौरा, मंगलौर, रुद्रपुर, गदरपुर और किच्छा में लागू किया जाएगा। कंपनी ने फिलहाल मैपिंग का काम शुरू कर दिया है। 

 
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उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन ने यूपीसीएल के इस फैसले पर आपत्ति उठाई है। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद कवि का कहना है कि इससे तो मीटर रीडर बेरोजगार हो जाएंगे। उनके ऊपर छंटनी की तलवार लटकने लगेगी। उन्होंने कहा कि यूपीसीएल पहले से ही घाटे में चल रहा है। मीटर रीडिंग की नई व्यवस्था लागू करने पर भारी-भरकम राशि खर्च की जा रही है, जिसका बोझ उपभोक्ताओं को उठाना होगा। कवि ने कहा कि यूपीसीएल का यह फैसला निजीकरण को बढ़ावा देने वाला है, जिसका विरोध किया जाएगा। 

मीटर रीडिंग की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए निजी कंपनी से करार किया गया है। इसका मकसद बिजली की खपत के मुताबिक राजस्व की प्राप्ति करना है। मीटर रीडरों से दूसरे कार्य लिए जाएंगे। वैसे भी निगम के पास कर्मचारियों की कमी है। किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी।
- बीसीके मिश्रा, प्रबंध निदेशक यूपीसीएल

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