हाईकोर्ट ने शुक्रवार को निजी स्कूलों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एनसीईआरटी) की किताबों को लागू करने के फैसले को सही माना। अंतरिम आदेश पारित करते हुए न्यायालय ने किताबों को लागू करने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे सख्त कदमों पर रोक लगाई और स्कूल संचालकों, प्रकाशकों से कहा कि वे अपनी उन्हीं किताबों को लागू कर पाएंगे जिनका मूल्य परिषद की किताबों के मूल्य के बराबर हो।
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स्कूल संचालकों और प्रकाशकों को इन किताबों को लागू करने से पहले रेट लिस्ट और किताबों की सूची प्रदेश सरकार को देनी होगी। 23 अगस्त 2017 को प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी विद्यालयों (आइसीएसई को छोड़कर) में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद की किताबों को लागू करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद इसी संबंध में 15 फरवरी, छह मार्च और नौ मार्च 2017 को भी आदेश जारी किए गए। इन आदेशों में किताबों को लागू न करने पर सख्त कार्रवाई का जिक्र किया गया था।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की ओर से जारी अंतरिम आदेश में बाद के तीन आदेशों पर रोक लगा दी गई। न्यायालय ने मूल रूप से 23 अगस्त 2017 के आदेश को बरकरार रखा है। इसके साथ ही न्यायालय ने निजी स्कूलों और प्रकाशकों को अपनी किताबें लागू करने पर किताबों और मूल्य की सूची राज्य सरकार तथा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद को देने का आदेश दिया।
संयुक्त विद्यालय प्रबंधन समिति ऊधम सिंह नगर और अन्य ने उच्च न्यायालय में अलग-अलग याचिकाएं दायर कर सरकार के 23 अगस्त 2017 के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि स्कूलों में प्रकाशकों की किताबों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सरकार का तर्क है कि ये किताबें महंगी दरों पर अभिभावकों को उपलब्ध कराई जाती हैं जिनसे उन पर अधिक व्यय भार पड़ता है। यह आदेश भेदभावपूर्ण है क्योंकि इसमें आईसीएसई को छोड़ दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई तीन मई को होगी। पिछले दो दिन से इस मामले को लेकर सुनवाई जारी थी।