उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में इन दिनों यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। बारिश के दिनों में यात्रा के दौरान भूस्खलन के कारण मार्गों का बंद होना आम बात है। इसके अलावा बरसात में सक्रिय होने वाले स्लिप जोन भी परेशानी का कारण बनते हैं।
Uttarakhand: पर्वतीय जिलों में इन दिनों यात्रा करना खतरे से खाली नहीं, ये है 360 से अधिक डेंजर स्लिप जोन
इनमें अल्मोड़ा में रानीखेत खंड, बागेश्वर में कपकोट, नैनीताल में रामनगर और भवाली, पिथौरागढ़ में डीडीहाट और अस्कोट, उत्तरकाशी में भटवाड़ी, चिन्यालीसौड़ और बडकोट, चमोली में गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, गैरसैंण, थराली और पोखरी, रुद्रप्रयाग में ऊखीमठ, टिहरी में नरेंद्रनगर, घनसाली, थत्यूड़ और नई टिहरी, देहरादून में साहिया, चकराता, ऋषिकेश और डोईवाला, पौड़ी में लैंसडौन, दुग्गडा, बेजरो, पाबौ और श्रीनगर, हरिद्वार में रुड़की और लक्सर निर्माण खंड शामिल हैं।
इस बार मशीनों को स्थायी तौर पर किया गया तैनात
शासन की ओर से इस बार चिह्नित डेंजर स्लिप जोन के नजदीक जेसीबी मशीनों को तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। लोनिवि के अधिकारियों की मानें तो सभी संवेदनशील स्थानों पर मैनपावर के साथ मशीनों की तैनाती की गई है, ताकि कम से कम समय में बंद हुई सड़कों को खोला जा सके।
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प्रदेश में कहां कितने लैंड स्लाइड जोन सक्रिय
| जिला | डेंजर जोन |
| अल्मोड़ा | 95 |
| बागेश्वर | 14 |
| नैनीताल | 15 |
| पिथौरागढ़ | 04 |
| चंपावत | 03 |
| उत्तरकाशी | 07 |
| चमोली | 27 |
| रुद्रप्रयाग | 33 |
| टिहरी | 96 |
| देहरादून | 14 |
| पौड़ी | 22 |
| हरिद्वार | 03 |
| कुल | 360 |
प्रदेश में डेंजर स्लिप जोन बरसात में हर साल सक्रिय होते हैं। इस बार पूर्व तैयारी के साथ विधिवत चिह्नित करने के साथ इनसे निपटने की तैयारी की गई है। जिलों में संबंधित निर्माण खंड में तैनात इंजीनियरों को इसके लिए विशेष तौर पर निर्देश दिए गए हैं। स्लिप आने पर कम से कम समय में मार्ग को खोला जा सके, इसके लिए जेसीबी मशीनों की तैनाती की गई है। - दीपक यादव, प्रमुख अभियंता लोनिवि