सात फरवरी को चमोली में आपदा के बाद बाढ़ की गाद (सिल्ट) हरिद्वार पहुंचनी शुरू हो गई। मौनी अमावस्या पर सिल्ट युक्त कम पानी में श्रद्धालुओं को स्नान करना पड़ा। सिल्ट के साथ बृहस्पतिवार को गंगा की मुख्य धारा का जलस्तर भी गिरकर 9300 क्यूसेक रह गया। इसका असर हरकी पैड़ी पर दिखा। मेला प्रशासन के मुताबिक, मौनी अमावस्या पर करीब तीन लाख 76 हजार श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
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हरिद्वार में गाद वाला पानी
- फोटो : अमर उजाला
मुख्य धारा का प्रवाह कम होने से भगीरथ बिंदु से हरकी पैड़ी के लिए करीब ढाई फुट पानी ही मिला। मेलाधिकारी ने बैराज के कंट्रोल रूम पहुंचकर पानी के लेवल का ग्राफ देखा और आगामी स्नान पर्वों पर हरकी पैड़ी में पानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
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बुधवार रात से मुख्य धारा में सिल्ट आने लगी थी। अत्यधिक सिल्ट आने से बैराज के मुख्य गेट खोले गए। इससे रात में हरकी पैड़ी एवं गंग नहर में पानी बंद हो गया। सुबह करीब तीन बजे मुख्य गेट बंद किए गए। इसके बाद गंग नहर में पानी छोड़ा गया और हरकी पैड़ी पर करीब ढाई फुट तक पानी पहुंचा।
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बैराज के वाटर एकाउंट असिस्टेंट निर्भय भारद्वाज के मुताबिक बृहस्पतिवार दोपहर को गंगा की मुख्य धारा में 9300 क्यूसेक पानी रिकाॅर्ड हुआ, जबकि बुधवार दोपहर 12 बजे 19 हजार क्यूसेक पानी था। बृहस्पतिवार को हरकी पैड़ी में ढाई फुट और गंग नहर में 4072 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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सिल्ट और कम पानी होने से श्रद्धालुओं को हरकी पैड़ी एवं अन्य घाटों पर स्नान करने में जूझना पड़ा। हरकी पैड़ी में पानी कम होने पर मेलाधिकारी दीपक रावत भीमगोडा बैराज के मुख्य कंट्रोल रूम पहुंचे और वाटर लेवल ग्राफ की जानकारी ली। कंट्रोल रूम के प्रभारी नलिन वर्धन से कहा कि मेला प्रशासन को वाटर लेवल की रिपोर्ट दी जाए।