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हर आंख में आंसू दे गए शहीद पवन, गमगीन माहौल के बीच दी अंतिम विदाई, तस्वीरें रुला देंगी

Sat, 12 Aug 2017 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ 
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़  Updated Sat, 12 Aug 2017 01:10 AM IST
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martyr pawan singh sugra funeral in pithoragarh
funeral

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के कृष्णा घाटी सेक्टर में आठ अगस्त को पाकिस्तानी सेना की ओर से की गई गोलीबारी में शहीद पवन सिंह सुगड़ा का शुक्रवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के समय मौजूद हजारों लोग की आंखें नम हो गईं। अंतिम यात्रा के समय रास्ते पर पड़ने वाले रोल, सिंतोला, कुंतोला, धराड़ी, नैनोलीकैणा, नागधूना, चौरपाल, सुगड़ी गांव के लोग हाथों में फूल लेकर खड़े रहे। 

martyr pawan singh sugra funeral in pithoragarh
funeral

सभी के मन में पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा था। शहीद के पार्थिव शरीर पर उनके ताऊ प्रताप सिंह ने तिरंगा चढ़ाया। बाद में प्रताप सिंह और शहीद के चचेरे भाई किशन सिंह ने चिता को मुखाग्नि दी। शहीद का पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार शाम यहां पहुंच गया था। रात में पार्थिव शरीर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया। सुबह पांच बजे सेना के जवान पार्थिव शरीर को लेकर शहीद के गांव सुगड़ी के लिए रवाना हुए और 7.25 बजे पार्थिव शरीर शहीद के घर पर पहुंच गया। 

martyr pawan singh sugra funeral in pithoragarh
funeral

करीब साढ़े तीन किलोमीटर का पैदल सफर तय करने के बाद शहीद की अंतिम यात्रा 9.05 बजे सरयू के किनारे स्थित रैकोला घाट पहुंची। सेना की ओर से 119 इंफेंट्री बटालियन के डिप्टी कमांडेंट कर्नल भूपेंद्र हाडा, कर्नल एसएस चौहान, कर्नल केके श्रीवास्तव, ले. कर्नल जेम्स सैमुअल, मेजर हिमांशु पंत, मेजर एके मिश्रा, सूबेदार जगत सिंह, उमेद सिंह, एसडीएम वैभव गुप्ता, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष शेर सिंह गुरौ, सैनिक कल्याण अधिकारी वीएस थापा, सहायक सैनिक कल्याण अधिकारी महावीर राणा, चंचल जरमाल, सुरेश जोशी, रमेश बोरा, पुलिस क्षेत्राधिकारी विमल आचार्य आदि ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ाए। 

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martyr pawan singh sugra funeral in pithoragarh
funeral

उसके बाद कुमाऊं राइफल्स के हवलदार विक्रम सिंह के नेतृत्व में सेना के जवानों ने शहीद को अंतिम सलामी दी। सेना की ओर से 119 इंफेंट्री ब्रिगेड ग्रुप के दो जेसीओ, 40 जवान, पंचशूल ब्रिगेड के दो अधिकारी, 195 मीडियम रेजीमेंट के दो जवान, 20 कुमाऊं रेजीमेंट के एक जोसीओ और दो जवान अंतिम संस्कार के समय मौजूद थे। सुगड़ी गांव में शहीद पवन का पार्थिव शरीर पहुंचते ही महिलाओं का करुण क्रंदन शुरू हो गया। 

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funeral

हर तरफ से सिर्फ रोने की आवाजें आ रही थीं। इतनी कम उम्र में देश के लिए शहीद होने वाले पवन की तस्वीर, उसका नटखट स्वभाव सभी की आंखों में तैर रहा था। 13 जून को डेढ़ महीने की छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर गए पवन का दो महीने के भीतर ही पार्थिव शरीर पहुंच गया। शहीद पवन की मां देवकी देवी और बहन वंदना बदहवास हालत में हैं। मां तो पार्थिव शरीर से लिपट गई। वह बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं। आठ अगस्त से उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा है। बहन वंदना की स्थिति भी ऐसी ही हो रही है। गांव के लोग सांत्वना तो दे रहे हैं, लेकिन कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहा है।

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