पंचांग के अनुसार शनिवार से मार्गशीर्ष (अगहन) मास शुरू हो गया है, जो 22 दिसंबर तक रहेगा। शास्त्रों में इस महीने को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप कहा गया है।
इस महीने में शंख पूजन का विशेष महत्व है। साधारण शंख को श्रीकृष्ण के पंचजन्य शंख के समान समझकर उसकी पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।
ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य ने बताया कि शनिवार से मार्गशीर्ष (अगहन) मास शुरू हो जाएगा, जो 22 दिसंबर तक रहेगा। पुराणों के अनुसार विधि-विधान से अगहन मास में शंख की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि इस मास में साधारण शंख की पूजा भी पंचजन्य शंख की पूजा के समान फल देती है।
उन्होंने बताया कि सभी वैदिक कामों में शंख का विशेष स्थान है। शंख का जल सभी को पवित्र करने वाला माना गया है, इसी वजह से आरती के बाद श्रद्धालुओं पर शंख से जल छिड़का जाता है। साथ ही शंख को लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है। इसकी पूजा महालक्ष्मी को प्रसन्न करने वाली होती है।
ऐसा माना जाता है समुद्र मंथन के समय शंख भी प्रकट हुआ था। विष्णु पुराण में बताया गया है कि देवी लक्ष्मी समुद्र की पुत्री हैं और शंख को लक्ष्मी का भाई माना गया है। इन्हीं कारणों से शंख की पूजा भक्तों को सभी सुख देने वाली मानी जाती है।