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बदरीनाथ के कपाट बंद होते ही देश के आखिरी गांव में सन्नाटा

Thu, 17 Nov 2016 11:03 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, जोशीमठ (चमोली)
ब्यूरो/ अमर उजाला, जोशीमठ (चमोली) Updated Thu, 17 Nov 2016 11:03 PM IST
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mana and bamni village after badrinath kapat close.
बामणी गांव - फोटो : AmarUjala

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होते ही धाम में स्थित बामणी और माणा गांव में तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और ग्रामीणों की चहल-पहल भी थम गई है।

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बदरीनाथ धाम - फोटो : AmarUjala

दोनों गांवों में सन्नाटा पसर गया है। यहां के ग्रामीण छह माह तक बदरीनाथ धाम की सेवा-भक्ति में लगे रहते हैं।

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mana village - फोटो : GirishRanjalTiwari

बामणी और माणा बदरीनाथ से जुड़े हकहकूकधारियों के गांव हैं। यहां के ग्रामीण धाम के कपाट खुलने के साथ ही अपने मवेशियों के साथ धाम में पहुंच जाते हैं।

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बामणी गांव - फोटो : AmarUjala

धाम में ग्रामीण आलू, राजमा, फाफर, गोभी और ऊन का उत्पादन करते हैं। ग्रामीण बदरीनाथ और घंटाकर्ण की सेवा भक्ति में लगे रहते हैं।

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बद्रीनाथ

कपाट बंद होने पर बामणी गांव के ग्रामीण पांडुकेश्वर तथा माणा गांव के भोटिया जनजाति के ग्रामीण जिले के गोपेश्वर, नैग्वाड़, घिंघराण, सिरोखोमा, सेंटुणा आदि स्थानों में निवास करते हैं।

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