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कैंसर ने छीन लिया जुबान और जबड़ा, फिर भी गाते हैं ऐसा कि दिल को छू जाते हैं इनके नगमे, सुनिए...

Sun, 10 Feb 2019 10:38 AM IST
अलका त्यागी आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 10 Feb 2019 10:38 AM IST
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Man doing singing without Tongue and jaw lost After Throat cancer in dehradun
संदीप गोयल

मुंह में जुबान और जबड़ा नहीं, कैंसर ने छीन लिया, जब दो शब्द बोलने की मोहताजी हो, ऐसे हालात में दून के संदीप गोयल सुरीली आवाज में नगमे गा रहे हैं। सुनकर यकीन नहीं होता, देखकर अचरज होता है,, मगर यह है हकीकत। संदीप को शहर के कई आयोजनों में गाते देखा जा सकता है। स्टेज पर उनके हल्के से थरथराते होठों से जब नगमे बाहर आते हैं, पार्श्व में उद्घोषक का गूंजता स्वर उनकी कहानी बताता है, तब लोग जान पाते हैं कि संदीप की जिजीविषा के आगे न केवल कैंसर ने घुटने टेक दिए, मौत ने मुंह मोड़ लिया, बल्कि उनकी पहली चाहत संगीत उनके जीवन को महका रही है। संदीप गोयल की स्वर लहरियां इन दिनों सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहीं हैं।


चौथी स्लाइड में सुनिए...

Man doing singing without Tongue and jaw lost After Throat cancer in dehradun
संदीप गोयल

ओएनजीसी में मैटेरियल मैनेजमेंट सुपरिटेंडेंट के पद पर कार्यरत विजय पार्क दून एनक्लेव निवासी संदीप गोयल की जिंदगी में तब तूफान आ गया, जब वर्ष 2011 में डॉक्टरों ने उनके मुंह में कैंसर बताया। कैंसर की आखिरी स्टेज थी तो संदीप को जीने की उम्मीदें भी कम थीं। इससे पहले संदीप की पहचान ओएनजीसी में शीर्ष स्तर के गायक के तौर पर भी रही थी। कई कार्यक्रमों में वह अपनी आवाज के जादू से पुरस्कार भी जीत चुके थे। कैंसर होने की खबर से संदीप भीतर से टूट गए लेकिन परिवार और दोस्तों ने मिलकर उन्हें समझाया।

Man doing singing without Tongue and jaw lost After Throat cancer in dehradun
संदीप गोयल

वह फरीदाबाद के एक अस्पताल में कैंसर के इलाज के लिए चले गए।  पांच साल तक कई स्तर की सर्जरी के बाद आखिरी स्टेज के कैंसर से तो मुक्ति मिल गई लेकिन इस इलाज ने उनकी जुबान और जबड़ा छीन लिया। अब वह न तो बोल पाते थे न ही खा पाते थे। पांच साल के इलाज के बाद जब वह वापस लौटे तो बिल्कुल टूट थे। उस वक्त परिवार और लंगोटिया यार  मनोज उनका सहारा बने।  मनोज बताते हैं, मैं संदीप के साथ बड़ा वक्त गुजारता था, कई बार मैने संदीप की आंखों में उस वक्त अजब-सी बैचेनी देखी, जब कहीं कोई मधुर गीत बज रहा होता।

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Man doing singing without Tongue and jaw lost After Throat cancer in dehradun
संदीप गोयल

मैंने उनकी उसी बेचैनी को उनकी ताकत बनाने की ठानी बार-बार समझाया कोशिश करो कुछ तो गाओ। यह सुनकर संदीप की आंखो में एक बेबसी तैर जाती थी। वक्त गुजरने का साथ मैं  मायूस होता जा रहा था। एक दिन व्हाट्सअप पर मुझे संदीप का एक मैसेज मिला, वह एक ऑडियो क्लिप थी। मैंने यूं ही उसे डाउनलोड कर ज्योंही उसे ऑन किया, मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं आया। वह संदीप की आवाज थी, वही सुरीली आवाज जो ओएनजीसी में उनकी पहचान थी। मैं कुछ ही देर में उनके सामने थे, खुशी से मेरी आंखों के कोर नम हो रहे थे, संदीप की आंखों से आंखें मिली।
 

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Man doing singing without Tongue and jaw lost After Throat cancer in dehradun
संदीप गोयल

भावातिरेक में मेरी जुबान को लकवा-सा मार गया था, आंखो ही आखों में शायद मैने यही कहा, दोस्त तुमने कर दिखाया। संदीप ने हां में सिर हिलाया, आंखों से आंसू के कुछ कतरे लुढ़क पड़े, मगर चेहरे पर सब कुछ जीत लेने का भाव था। कुछ कर गुजरने का अहसास था, रियाज दर रियाज स्वर निखरता गया, शब्द चमकते गए। कुछ हंसते हुए कहते हैं, अब तो संदीप गाना सुनाने की बात पर भाव भी खाने लगे हैं। दोनों दोस्त हाथ पकड़े निश्छल भाव से यूं हंस रहे थे, मानो वक्त को चुनौती दे रहे हों।

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