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महाकुंभ 2021: यहां नागा संन्यासी कुंभ के बीच खेलते हैं खास तरह की होली, पढ़ें इस महापर्व की खास बातें... 

Tue, 02 Mar 2021 01:14 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 02 Mar 2021 01:14 PM IST
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Maha Kumbh Mela 2021: Naga Saints Play Gobari Holi during Kumbh Only in Haridwar Interesting Facts
नागा साधू - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

चार कुंभ महापर्व स्थलों में हरिद्वार अकेला नगर है जहां कुंभ के बीच होली का पर्व पड़ता है। प्रयाग, उज्जैन और नासिक के कुंभ के दौरान होली का त्योहार नहीं आता है। होली पर नागा संन्यासियों के अखाड़ों में जोरदार गोबरी होली खेली जाती है। गोबरी होली के बाद राख से बने गोले भी पूजे जाते हैं। बैरागियों के अखाड़ों में गुलाल से गुलाबी होली खेली जाती है।



नागाओं के अखाड़ों में गोबरी होली खेलने के लिए गौशालाओं से गोबर इकट्ठा करने का काम पहले से शुरू हो जाता है। होली खेलने के लिए केवल गाय का गोबर इकट्ठा होता है। नागा संन्यासी धूने की राख से छोटे बड़े गोले भी तैयार करते हैं। इन गोलों का आकार गोल, आयताकार और त्रिशंकु भी होता है।

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इन गोलों का पूजन होली के दिन शुरू हो जाता है। गोला पूजन के लिए मढ़ियों के महंत रमता पंचों के साथ उन आश्रमों में भी जाते हैं, जो उनके अखाड़ों से जुड़े हुए हैं। गोला पूजन होली के बाद भी चलता रहता है। गोबरी होली खेलते हुए संन्यासियों के बीच छोटे बड़े का भेद मिट जाता है।

Maha Kumbh Mela 2021: Naga Saints Play Gobari Holi during Kumbh Only in Haridwar Interesting Facts
हरिद्वार कुंभ में आए संत - फोटो : अमर उजाला

सभी नागा गोबर से रंगे जाते हैं। बैरागी अखाड़ों में ठाकुर जी के साथ गुलाबी होली खेलने की परंपरा है। वैष्णव संत अपने आराध्य कृष्ण और राम के पूजा स्थलों पर भगवान को भोग लगाते हैं और गुलाल लगाकर होली खेलते हैं। ठाकुर जी के बाद परस्पर गुलाबी रंग का गुलाल लगाया जाता है। बैरागियों की होली काफी शांतिपूर्ण ढंग से मनाई जाती है।

Maha Kumbh Mela 2021: Naga Saints Play Gobari Holi during Kumbh Only in Haridwar Interesting Facts
हरिद्वार कुंभ में आए संत - फोटो : अमर उजाला

कुंभ मेले पर अखाड़ों के तमाम उत्सव पेशवाइयों के रूप में होने वाले नगर प्रवेश से प्रारंभ होते हैं। इस दौरान अखाड़ों में नागाओं के धुने सजते हैं, धर्मध्वजा स्थापित की जाती है और दीक्षा समारोहों सहित अनेक प्रकार की गतिविधियां चलती रहती हैं। कुंभ के शाही स्नानों के लिए रमतापंचों और अखाड़ों की मणियों में अनेक पर्व मनाए जाते हैं।

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Maha Kumbh Mela 2021: Naga Saints Play Gobari Holi during Kumbh Only in Haridwar Interesting Facts
हरिद्वार कुंभ में आए संत - फोटो : अमर उजाला

शाही स्नानों के बाद अखाड़ों में आयोजित कढ़ी पकौड़ा से कुंभ के समापन का एलान किया जाता है। तब कुंभ में निर्वाचित नए रमता पंच अखाड़ों के तंबू उखाड़कर अगले कुंभ के लिए रवाना हो जाते हैं। कुंभ मेला यूं तो जनकुम्भ हैं, लेकिन उनमें सांस्कृतिक रंग साधु संतों के आगमन से ही भरना शुरू होता है। इन्हीं दिनों अखाड़ों में भीतरी सत्ता परिवर्तन होते हैं। श्रीमहंतों के बीच कार्य विभाजन नए सिरे से होता है।

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Maha Kumbh Mela 2021: Naga Saints Play Gobari Holi during Kumbh Only in Haridwar Interesting Facts
हरिद्वार कुंभ में आए संत - फोटो : अमर उजाला

एक मणि से प्रबंध दूसरी मणि को चले जाते हैं। धर्मध्वजा स्थापना के पश्चात आचार्यों की भूमिका शुरू हो जाती है। नए नागाओं को दीक्षित करने के साथ-साथ महामंडलेश्वरों के पट्टाभिषेक और कार्य विभाजन चलते हैं। इसी प्रकार भंडारे और समष्टि भंडारे के आयोजन शुरू हो जाते हैं। शाही स्नानों के लिए अखाड़ों को व्यापक प्रबंध करने पड़ते हैं । कुंभ मेले के स्नान सम्पन्न हो जाने पर कढ़ी पकौड़ा भोज के साथ अखाड़ों के सांस्कृतिक आयोजन संपन्न होते हैं।

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