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कुंभ मेला 2021: अखाड़ों के होते हैं बेहद सख्त कानून और संविधान, गलती पर नहीं मिलती माफी, पढ़ें रोचक बातें...

Tue, 02 Mar 2021 12:54 PM IST
अलका त्यागी निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार
निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 02 Mar 2021 12:54 PM IST
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Haridwar Maha Kumbh Mela 2021: Interesting History of Akhara Strict Rules and regulations
हरिद्वार कुंभ में आए संत - फोटो : अमर उजाला

कुंभ में स्नान के लिए आने वाले अखाड़ों की अपनी दुनिया और अपना कानून व संविधान है। कानून भी बेहद सख्त है। संविधान से ही अखाड़ों की व्यवस्थाएं चलती हैं। महाकुंभ से लेकर हर छोटे-बड़े धार्मिक आयोजन और अखाड़े संचालन में कार्यपालिका व न्यायपालिका अहम भूमिका निभाती है। नागा संन्यासियों से लेकर सर्वोच्च पदों पर आसीन संत महापुरुषों को कानून और संविधान के दायरे में रहना पड़ता है। इससे बाहर जाने पर दंड का प्रावधान भी है।



श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े से दुनियाभर के संन्यासी जुड़े हैं। इसकी स्थापना 1145 को हुई है। आठ सौ महामंडलेश्वर, छह हजार श्रीमहंत और लाखों संत अखाड़ा का हिस्सा हैं। सर्वाधिक नागा संन्यासी इसी अखाड़े से जुड़े हैं। इनमें सर्वोच्च पद आचार्य महामंडलेश्वर का है। अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि बताते हैं अखाड़ा की 17 सदस्यों की कैबिनेट होती है।

यह भी पढ़ें... कुंभ मेला 2021: निरंजनी अखाड़े की मणियों की शान बनेंगे मुगल तंबू, राजशाही ठाठ बाट से रहेंगे संत

न्यायपालिका और कार्यपालिका की आठ-आठ सदस्य कैबिनेट के प्रमुख होते हैं। न्यायपालिका के आठ सदस्यों में चार श्रीमहंत और चार अष्ट कौशल महंत होते हैं। कार्यपालिका में चार मंत्री, चार थानापति और एक सभापति होता है। न्यायपालिका सुनवाई करती है, जबकि कार्यपालिका का दायित्व प्रशासनिक व्यवस्थाओं का संचालन करना है।

Haridwar Maha Kumbh Mela 2021: Interesting History of Akhara Strict Rules and regulations
हरिद्वार कुंभ में आए संत - फोटो : अमर उजाला

न्यायपालिका सर्वोच्च है और कार्यपालिका को भंग कर सकती है। इसके लिए एक तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। अखाड़ा के कानून और संविधान को तोड़ने वालों को सजा दी जाती है। बतौर सजा संतों और नागा संन्यासी को बहिष्कार किया जाता है और अखाड़ा में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।

Haridwar Maha Kumbh Mela 2021: Interesting History of Akhara Strict Rules and regulations
हरिद्वार कुंभ में आए संत - फोटो : अमर उजाला

निरंजनी अखाड़ा से सर्वाधिक शिक्षित संत महंत जुड़े हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अखाड़ा का सबसे बड़ा योगदान है। अखाड़ा के बीस से अधिक संस्कृत महाविद्यालय और हरिद्वार में दो कॉलेज हैं। निरंजनी अखाड़ा दान नहीं लेता है। जागिरी (संपत्ति) ही उसकी आय का स्रोत है। 

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Haridwar Maha Kumbh Mela 2021: Interesting History of Akhara Strict Rules and regulations
हरिद्वार में डेरा जमाए संत - फोटो : अमर उजाला

अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी बताते हैं अखाड़े का संविधान 1904 में बना है। न्यायपालिका में आठ श्रीमहंत होते हैं, जिनको अष्ट कौशल भी कहते हैं। अष्ट कौशल ही अखाड़ा की जागिरी की देखरेख करते हैं। इनमें पांच श्रीमहंतों का फैसला सर्वमान्य होता है।

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Haridwar Maha Kumbh Mela 2021: Interesting History of Akhara Strict Rules and regulations
हरिद्वार कुंभ में आए संत - फोटो : अमर उजाला

इसलिए इनको पंच परमेश्वर भी कहा जाता है। जबकि कार्यपालिका में दस उप महंत बतौर सदस्य होते हैं। इनका दायित्व अखाड़ा की व्यवस्थाओं का संचालन होता है। निरंजनी और जूना अखाड़ा की तरह शैव अखाड़ा के अपने कानून और विधि विधान हैं। जबकि वैष्णव अखाड़ों के नियम अलग हैं। 

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