प्रेमिका की हत्या कर मौत को गले लगाने से एक रात पहले कृष्णा मल्होत्रा ने खूब आंसू बहाए थे, क्योंकि कृष्णा को पहला प्यार खोने का डर सता रहा था। उसे समझाने की खूब कोशिश हुई, लेकिन कृष्णा कुछ सुनने को तैयार नहीं था। मंगलवार तीसरे पहर वह प्रेमिका को सामान्य अंदाज में लेकर फ्लैट पर पहुंचा था।
आखिर उनके बीच ऐसा क्या हुआ कि कृष्णा को मेरी नहीं तो किसी की नहीं की तर्ज पर हत्या और खुदकुशी का कदम उठाना पड़ा। पुलिस मान रही है कि घटना पूरी तरह अप्रत्याशित है। घटना का असली सच तो कृष्णा मल्होत्रा और कशिश मान के साथ ही चला गया, लेकिन घटनास्थल और परिजनों से हुई बातचीत के आधार पर पुलिस ने जो थ्योरी तैयार की है, उसमें कशिश मान का पक्ष कम और कृष्णा मल्होत्रा के इश्क का जुनून ज्यादा हावी नजर आ रहा है।
उनकी प्रेम-कहानी दोनों परिवारों से छिपी नहीं थी। उनके बीच सब कुछ सामान्य था। दोनों एक दूसरे पर जान लुटाने को आतुर थे, मगर एक सप्ताह के घटनाक्रम ने उनके बीच के विश्वास की डोर को कमजोर बना दिया। पुलिस के मुताबिक कृष्णा अपने दिल की बात अपने जीजा परमवीर से करता था। शुरुआती दौर में जीजा ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।
बताया गया कि कशिश की कथित बेवफाई को लेकर सोमवार रात कृष्णा मल्होत्रा जी भरकर रोया था। राजपुर थानाध्यक्ष अरविंद कुमार के मुताबिक जीजा ने उसे समझाने की कोशिश की थी। यहां तक कह डाला था कि कशिश नहीं तो और सही, लेकिन कृष्णा रोता रहा... वह कशिश को किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं था।
देर रात जीजा ने उसे कसमें वायदे देकर शांत करा दिया था। फिर अगले दिन मंगलवार सुबह उठने के बाद कृष्णा ने अपना दर्द किसी से साझा नहीं किया। दोपहर को जीजा से मिलकर वह बिना बताए निकल गया। शाम चार बजे के करीब प्रेमिका को लेकर जीजा के फ्लैट पर आ गया।