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नीरव मोदी की तरह यहां बड़े बकाएदारों ने दबाया बैंकों का इतना पैसा कि रकम जानकर हैरत में पड़ जांएगे

Thu, 08 Mar 2018 07:20 AM IST
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 08 Mar 2018 07:20 AM IST
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like nirav modi big businessman is in debt of banks
Nirav Modi, PNB Scam

हीरा व्यापारी नीरव मोदी की तरह यहां बैंकों के करोड़ों रुपये बड़े बकाएदार दबाकर बैठ गए हैं। इन बकाएदारों से लगातार ऋण की रकम जमा कराने को कहा जा रहा है, लेकिन बैंकों को कामयाबी नहीं मिल पा रही है।


 

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हालात यह हैं कि खुद रिजर्व बैंक भी उत्तराखंड के बैंकों पर बढ़ते एनपीए के बोझ से चिंतित है। हाल ही में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में भी एनपीए का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। प्रदेशभर में एक लाख 87 हजार 961 ऐसे डिफॉल्टर हैं, जो बैंकों से मोटा लोन लेकर बैठ गए हैं।

 
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एसएलबीसी से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में कुल 37 बैंक हैं, जिनमें से 35 बैंकों का एनपीए 3242.83 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। जबकि 31 मार्च 2017 को यह आंकड़ा 2495.09 करोड़ था। 31 मार्च से 31 दिसंबर 2017 के बीच महज नौ माह में बैंकों का 747.74 करोड़ रुपये का लोन एनपीए हो गया। हालांकि अभी अप्रैल में पूरे वर्ष का एनपीए डाटा आएगा तो यह आंकड़ा और बढ़ा हुआ सामने आएगा।

 
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PNB Scam
प्रदेश के बैंक इस एनपीए की वजह से लगातार गिरावट की ओर जा रहे हैं। जिससे बैंकिंग प्रणाली बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। बैंकों के आला अधिकारी दबी जुबान में यह भी बता रहे हैं कि यहां भी कई नीरव मोदी और मेहुंल चौकसी हैं जो कि बैंकों का पैसा लेकर फुर्र हो गए हैं। आंकड़ों पर यकीन करें तो पीएनबी का एनपीए सबसे ज्यादा है। इसके बाद एसबीआई और बीओबी का नंबर आता है। प्रदेशभर के कॉपरेटिव बैंकों पर भी एनपीए का दबाव तेजी से बढ़ रहा है।

 
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प्रकाश पंत - फोटो : SELF
मार्च 2017 में कॉपरेटिव बैंकों का 31283 लाख रुपये एनपीए था, लेकिन यह दिसंबर 2017 में बढ़कर 43992.20 लाख रुपये तक पहुंच गया। वहीं, वित्त मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि एनपीए को कम करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अगर बैंक बड़े डिफॉल्टर की सूची उपलब्ध कराएं तो सरकार अपने स्तर से कार्रवाई को तैयार है।

 
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