उत्तराखंड के अल्मोड़ा में ग्राम पंचायत चौकुड़ी में एक तेंदुआ सड़क किनारे खेत में लगाई तारबाड़ में फंस गया। इस दौरान वह तारबाड़ की चपेट से बाहर निकलने के लिए गुर्राता रहा। करीब ग्यारह घंटे बाद वह तारबाड़ से मुक्त हुआ तो पास के मंदिर में घुस गया। देखिए फिर क्या हुआ...
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तेंदुए का रेस्क्यू
- फोटो : अमर उजाला
इससे लोगों में हडकंप मच गया। लोगों के शोर मचाने पर वह पास की बस्ती में संकरी गली में घुस गया। जहां तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे ट्रैंक्यूलाइज कर पिंजरे में कैद किया गया। ग्राम पंचायत चौकुड़ी के मल्ली चौकुड़ी में ही तेंदुआ सड़क किनारे खेत में लगाई गई तारबाड़ में फंस गया था।
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तेंदुए का रेस्क्यू
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शाम करीब तीन बजे तार से छूटकर भागा और वहीं पास में एक मंदिर में जा घुसा। इससे आसपास के दहशत में आ गए। सूचना पर अल्मोड़ा से पहुंची ट्रैंक्यूलाइजर टीम कुछ कर पाती उससे पहले ही वह निकट की बस्ती में ही एक मकान के पीछे दुबक गया।
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तेंदुए का रेस्क्यू
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ट्रैंक्यूलाइजर गन द्वारा तीन बार निशाना साधने के बावजूद तेंदुए के बेहोश न होने से मौके पर मौजूद वन कर्मी परेशान हो गए। बाद में वह बेहोश हो गया। अल्मोड़ा जू में तैनात वन बीट अधिकारी खजान मेहता ने तेंदुए के पैर में रस्सी का फंदा लगाकर उसे किसी तरह काबू में किया। थानाध्यक्ष रमेश सिंह बोहरा ने तेंदुए को खींचने में मदद की। इस दौरान जिपंस गजेंद्र नेगी और नंदन मेहरा सहित दर्जनभर ग्रामीणों ने सहयोग किया।
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तेंदुए का रेस्क्यू
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मौके पर मौजूद भारी भीड़ और शोरगुल के चलते वन कर्मयिं को तेंदुए को काबू में करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान एक वन कर्मी हाथ जोड़ते हुए ग्रामीणों से शोर न करने का आग्रह करता रहा। पुलिस कर्मी भी लोगों को शांत रहने के लिए समझाते रहे। तेंदुए को पकड़ने के लिए चले आपरेशन के पहले ही चरण में तेंदुए के मंदिर से भागते समय मची भगदड़ के दौरान वन क्षेत्राधिकारी नवीन टम्टा पैर मुड़ जाने से घायल हो गए।