जिस ऑल वुमेन फ्लाइट ने दुनिया का चक्कर लगाकर सबसे लंबी फ्लाइट का रिकॉर्ड बनाया, उसे उत्तराखंड की बेटी पायलट क्षमता वाजपेयी ने कमांड किया था। उत्तराखंडियों के लिए यह रिकॉर्ड इस वजह से बेहद अहम है।
फ्लाइट से दुनिया का चक्कर लगाकर उत्तराखंड की बेटी बन गई दुनिया का 'सितारा'
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1996 में बतौर पायलट एयर इंडिया में हुईं शामिल
1968 में दिल्ली में जन्मी क्षमता ने लेडी इरविन स्कूल से पढ़ाई करने के बाद रायबरेली की इंदिरा गांधी उड़ान एकेडमी से फ्लाइंग का कोर्स किया। 1996 में वह बतौर पायलट एयर इंडिया में शामिल हुईं।
क्षमता को भारत की तीसरी और उत्तराखंड की पहली महिला कमांडर होने का गौरव भी हासिल है। उनके जीजा और दिल्ली के प्रसिद्ध उद्योगपति भारत पांडे ने बताया कि उनका विवाह लखनऊ के कैप्टन सुशील वाजपेयी से हुआ।
क्षमता के 21 वर्षीय पुत्र मेहुल ने करीब एक वर्ष पहले स्पाइस जेट में बतौर कैप्टन सेवा शुरू की है। 2004 में पहली बार सिंगापुर गई ऑल वूमन फ्लाइट में भी क्षमता बतौर पायलट शामिल थीं।
साढ़े पंद्रह घंटे में करीब 15,300 किलोमीटर की दूरी तय की
27 फरवरी को एयर इंडिया की आल वूमन फ्लाइट नंबर एआई-173 दिल्ली से जापान के ऊपर होते हुए सैन फ्रांसिस्को के लिए रवाना हुई। यहां से यूरोप के ऊपर से होते हुए फ्लाइट नंबर एआई-174 तीन मार्च को वापस दिल्ली पहुंची।
उन्होंने जाते वक्त साढ़े पंद्रह घंटे में करीब 15,300 किलोमीटर की दूरी तय की। लौटते वक्त इतने ही समय में करीब 14,400 किलोमीटर का सफर तय किया।
टीम में क्षमता समेत पायलट सुनीता नरूला, गुजंन अग्रवाल और इंदिरा सिंह शामिल रहीं। 12 महिलाओं के क्रू की टीम लीडर निशरीन बंदूकवाला थीं। साथ ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल स्टाफ और डिस्पैच स्टाफ में भी सभी महिला कर्मचारी शामिल रहीं।
कॉकपिट से क्रू तक महिलाएं
ऑल वूमन फ्लाइट में कॉकपिट से लेकर क्रू और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से लेकर डिस्पैच तक की जिम्मेदारी महिलाओं के हाथ होती है। साथ ही केबिन, चेक इन स्टाफ, चिकित्सक, कस्टमर केयर स्टाफ और संचालन का पूरा जिम्मा भी महिला अधिकारियों व कर्मचारियों के पास ही रहता है।