आगामी 3 सितंबर को श्रीकृष्ण जनमाष्टमी धूमधाम से मनाई जाएगी। लेकिन क्या आपको पता है कि जब कान्हा को सर्पदंश योग लगा था तो उनकी रक्षा के लिए यह खास चीज कहां से लाई गई थी। नहीं तो चलिए यहां जान लेते हैं।
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krishna janmashtami 2018
- फोटो : अमर उजाला
श्री कृष्ण की लीलाओं का दीवाना तो हर कोई है। लेकिन उनके माथे पर लगा मोरपंख उनकी नटखट छवि को और भी नटखट बना देता है। लेकिन क्या आपको पता है कि उनके इस मोरपंख का कनेक्शन उत्तराखंड के हरिद्वार से रहा है।
किंदवंतियों के अनुसार, जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ तो उनकी कुंडली में सर्प दंश योग था। यानी जीवन में कभी ना कभी उनको नाग से खतरा हो सकता है। वहीं उनके नामकरण कराने के लिए आए कात्यायन ऋषि ने इस दोष को दूर करने के लिए मोरपंख लाने के लिए कहा।
उन्होंने कहा कि, मनसादेवी पर्वत से निकलने वाले नारायण स्रोत के आसपास के इलाके से ही मोर का पंख लाना होगा। कहा जाता है कि, इस जगह का महत्त्व इसलिए है क्योंकि इस पर्वत पर नाग पुत्री मनसादेवी विराजमान हैं।
मोर नाग का दुश्मन होता है इसलिए यह पंख अगर वहां से लाया जाएगा तो कान्हा का दोष खत्म हो जाएगा। वहीं हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर सबसे ज्यादा मोर पाए जाते थे। तब उन्होंने हरिद्वार के इसी पर्वत से पंख लाकर दिया। तभी से श्रीकृष्ण के मुकुट में मोरपंख विराजमान है।
(अमर उजाला इन तथ्यों की तस्दीक नहीं करता है। यह केवल मान्यताओं के आधार पर ही दिए गए हैं।)