स्वीडन के राजा कार्ल गुस्ताफ अपनी पत्नी सेल्विया गुरुवार को ऋषिकेश के मुनिकीरेती पहुंचे। हुंचने के बाद प्रसिद्घ पर्यावरण कर्मी सुनीता नारायणन ने राम झूला पुल पर उनका स्वागत किया। इसके बाद वे करीब 15 मिनट तक रामझूला पुल पर रुककर मां गंगा की मनोरम छटा का दीदार किया।
इसके बाद राजा और रानी अपने दल के साथ नावघाट पहुंचे। यहां नागपुर से विशेष तौर पर आमंत्रित की गई महिला पुरोहित शशि त्रिपाठी और दया व्याघ्र ने उनका धार्मिक अनुष्ठान कराया। घाट पर पहुंचने के बाद पुरोहित शशि त्रिपाठी ने तिलक लगाया और पुष्प भेंटकर स्वागत किया। इसके बाद करीब आधे घंटे तक पूजन अनुष्ठान हुआ।
करीब 10:30 बजे मुनिकीरेती पहुंचे। इस दौरान एक दर्जन से अधिक गाड़ियों का काफिला उनके साथ रहा। सुरक्षा इंतजाम बेहद कड़े रखे गए। इस दौरान स्नान करने वाले श्रद्धालु नाव घाट से रामझूला रोड तक नहीं जा पाए। रामझूला रोड पर दुकानें तो खुलीं मगर व्यापारी अपने वाहनों को सड़क पर खड़ा नहीं कर सके।
धार्मिक अनुष्ठान के बाद राजा और रानी पर्यावरण कार्यकर्ता रिद्धिमा पांडेय व उनकी सहयोगी बालिकाओं से बात की। राजा ने बच्चों से गंगा स्वक्षता और पर्यावरण संरक्षण पर हो रहे प्रयासों के बारे में करीब 15 मिनट वार्ता की। इसके बाद वे हरिद्वार के लिए रवाना हो गए।
घाट पर अतिविशिष्ट मेहमानों के लिए कुर्सी लगाई गई थी। समीप ही स्थित चबूतरे पर पूजा की बेदी सजा दी गई थी। पुरोहितों में से दया व्याघ्र पूजन प्रक्रिया कर रही थीं जबकि शशि त्रिपाठी ने मंत्रों का संस्कृत में घोष किया और क्रमश: अंग्रेजी में अनुवाद कर राजा और रानी को उनका अर्थ बताया। पुरोहित शशि त्रिपाठी और दया व्याघ्र ने बताया कि सबसे पहले विधान के अनुसार गणेश पूजन करवाया गया।