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केदारनाथ : बाबा केदार के स्वयंभू लिंग के पृष्ठ भाग की होती है पूजा, भगवान शिव ने पांडवों को यहां किया था पाप मुक्त

Mon, 17 May 2021 01:58 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 17 May 2021 01:58 PM IST
सार

पांडव द्रोपदी के साथ केदारघाटी के गांवों से होते हुए केदारनाथ धाम पहुंचे थे। लेकिन भगवान शिव उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे और पांडवों से दूर-दूर भागते रहे। जबकि पांडव आराध्य शिव का पीछा करते रहे।

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kedarnath : mythological story of kedarnath dham, here lord shiva did pandavas guilt free
केदारनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला

द्वापर युग में महाभारत युद्ध के उपरांत केदारनाथ में भगवान शिव ने पांडवों को दर्शन देकर उन्हें गोत्र, गुरु व ब्राह्मण हत्या के दोष से मुक्त किया था। यहां भगवान के स्वयंभू लिंग के पृष्ठ भाग की पूजा होती है। साथ ही प्रतिदिन आराध्य को भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि द्वापर में महाभारत युद्ध में पांडवों पर गोत्र व गुरु हत्या का पाप लगा था। तब, उन्हें महर्षि नारद ने हिमालय भ्रमण कर भगवान शिव के दर्शन करने को कहा था। इसके बाद पांडव द्रोपदी के साथ केदारघाटी के गांवों से होते हुए केदारनाथ धाम पहुंचे थे। लेकिन भगवान शिव उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे और पांडवों से दूर-दूर भागते रहे। जबकि पांडव आराध्य शिव का पीछा करते रहे। इस मौके पर भगवान शिव ने पांडवों से बचने के लिए भैंस का रूप धारण कर लिया और केदारपुरी क्षेत्र में विचरण करते हुए भैंसों के समूह में मिल गए। केदारनाथ पहुंचे पांडवों में भीम ने भगवान शिव को पहचान लिया, यह देख भैंस का रूप धारण किए हुए भगवान शिव भूमि में धंसने लगे। लेकिन भीम ने भैंस का पृष्ठ भाग पकड़ लिया। इसके बाद भगवान शिव ने प्रसन्न होकर पांडवों को दर्शन देकर गोत्र व गुरु हत्या के पाप से मुक्त किया।

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केदारनाथ  - फोटो : अमर उजाला

इसी के तहत केदारनाथ में भगवान शिव के स्वयंभू लिंग के पृष्ठ भाग की पूजा की जाती है। जबकि अग्र भाग की पूजा नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में होती है। वहीं, नाभि की पूजा द्वितीय केदार मद्महेश्वर, बाहु की पूजा तृतीय केदार तुंगनाथ, नेत्र की पूजा चतुर्थ केदार रुद्रनाथ और जटाओं की पूजा कल्पेश्वर धाम में होती है।

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केदारनाथ  - फोटो : अमर उजाला

मान्यता है कि नौंवी सदी में आदिगुरु शंकराचार्य ने केदारनाथ मंदिर का पुनरोद्धार किया था। यह भी मान्यता है कि शंकराचार्य इसी स्थान से सीधे स्वर्ग सिधारे थे। केदारनाथ मंदिर के सभामंडप में पांच पांडवों के साथ द्रोपदी की मूर्ति भी विराजमान है। रावल भीमाशंकर लिंग बताते हैं कि भगवान आशुतोष के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक केदारनाथ के स्मरण मात्र से ही भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं। 

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केदारनाथ  - फोटो : अमर उजाला

आज केदारनाथ के कपाट खुल गए हैँ और कल 18 मई को बदरीनाथ के कपाट खुल रहे हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रदेश सरकार ने चारधाम को स्थगित कर दिया है। लगातार दूसरी बार यात्रा पर रोक लगाने पर तीर्थ पुरोहितों में नाराजगी व्यक्त की है।

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केदारनाथ  - फोटो : अमर उजाला

तीर्थ पुरोहितों को कहना यात्रा स्थगित होने से उनकी अजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। तीर्थ पुरोहितों ने कोरोना जांच रिपोर्ट की बाध्यता के साथ चारधाम यात्रा को शुरू करने की मांग की है।

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