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जब केदारनाथ पहुंच कर डॉक्टरों की टीम को याद आया शिव तांडव, रातों को सुनाई दी थी भयानक आवाजें

Fri, 10 May 2019 06:10 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 10 May 2019 06:10 AM IST
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kedarnath dham gate open for char dham yatra 2019 Horrible incident
अमर उजाला

केदारनाथ में आई आपदा को पांच साल से ज्यादा का वक्त हो गया। धाम में पुनर्निर्माण कार्य 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है, लेकिन जलप्रलय की कड़वी यादें आज भी उत्तराखंड के हर वासी के जहन में जिंदा हैं। आज भी कपाट खुलने के वक्त धाम में पहुंचे भक्त आपदा का जिक्र करते दिखाई दे रहे थे। आइए आपको बताते हैं उस समय का एक वाक्या...

kedarnath dham gate open for char dham yatra 2019 Horrible incident

साल 2013 में जून 16-17 को केदारनाथ में भयानक तबाही मची थी। इस दौरान केदारघाटी से लौटी देहरादून के डाक्टरों की टीम ने बताया था कि घाटी में महा विनाश देखकर पौराणिक कथाओं में वर्णित शिव तांडव याद आ गया। उस वक्त वहां लगातार भूस्खलन हो रहा था। आपदाग्रस्त क्षेत्रों में राहत कार्य के लिए यह टीम 2 जुलाई 2013 को गई थी और 10 जुलाई को वापस आई।
 

kedarnath dham gate open for char dham yatra 2019 Horrible incident

उन्हें रातों में भयानक आवाजें सुनाई देती थीं। चट्टानों के गिरने से तेज धमाका होता था। 12 फीट मलबे में दबी लाशों पर चलकर उन्होंने राहत कार्य किया था। उनका कहना था कि मलबे में कितने लोग दबे हैं इसका अंदाजा ही नहीं है।
 

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उन्होंने बताया कि वहां मौजूद जानवरों का मिजाज उग्र हो गया था। आदमी को देखते ही खच्चर और गाय मारने को दौड़ पड़ते थे। केदारघाटी में शवों के दाह संस्कार के लिए गई टीम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ कुल 74 लोग शामिल थे।

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टीम में डा. विमिलेश जोशी, पशु चिकित्सक डा. शैलेंद्र वशिष्ठ, डा. प्रदीप उनियाल भी थे। वह बड़ी मुश्किल से 16 शव निकाल पाए थे। उनका डीएनए सैंपल लिया गया। बताया कि घाटी में पुराने रास्ते खत्म हो गए थे। केदारघाटी में बचे खच्चर, गाय, भैंस और कुत्तों का मिजाज बदल गया था।

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