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Joshimath: पुनर्वास और राहत पैकेज के विकल्पों की तलाश, बेनाप भूमि पर बसे हैं सैकड़ों, अब मुआवजे में दिक्कत

Sun, 29 Jan 2023 10:24 AM IST
रेनू सकलानी विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 29 Jan 2023 10:24 AM IST
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Joshimath Sinking Government engaged in making displacement rehabilitation and relief package of affected
जोशीमठ भू-धंसाव: लोगों ने छोड़े अपने घर - फोटो : अमर उजाला

जोशीमठ में आपदा प्रभावितों को संकट से उबारने के लिए सरकार कई स्तरों पर प्रयास कर रही है। इसमें सबसे बड़ी चुनौती पुनर्वास, विस्थापन और राहत पैकेज को लेकर है। स्थानीय लोग ही इन मुद्दों पर एकराय नहीं हैं। ऐसे में सरकार को सहमति बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।



इस संबंध में सरकार ने जिला प्रशासन और शासन स्तर पर दो कमेटियों का गठन किया है। जिला स्तर पर गठित कमेटी में स्थानीय प्रभावितों को भी शामिल किया गया है। ताकि उनकी सुझावों को शामिल करते हुए एक ठोस और प्रभावी नीति तैयार की जा सके।

स्थानीय लोगों की चाहत, आसपास ही मिले आवास और दुकान
जोशीमठ में कई श्रेणियों में विस्थापन और पुनर्वास होना है। पहली श्रेणी उन लोगों की है, जो जोशीमठ के मूल बाशिंदे हैं। यह लोग किसी कीमत पर जोशीमठ से दूर नहीं होना चाहते। इनकी मांग है कि इन्हें जोशीमठ के आसपास ही आवास, दुकान या खेती की जमीन दी जाए। इनमें सर्वाधिक लोग ऐसे हैं, जिनका व्यवसाय पूरी तरह से धार्मिक, प्राकृतिक और साहसिक पर्यटन पर टिका है। बदरीनाथ यात्रा, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी और औली तीन ऐसे प्रमुख केंद्र हैं जिनसे लोग दूर नहीं होना चाहते।

Joshimath Sinking Government engaged in making displacement rehabilitation and relief package of affected
अपने घर खाली करते जोशीमठ के लोग - फोटो : अमर उजाला

आसपास के गांवों से आकर बसे लोग भी नहीं जाना चाहते दूर
आसपास के गांवों से आकर जोशीमठ में बसे लोग भी दूर नहीं जाना चाहते हैं। इनकी भी पहली मांग जोशीमठ के आसपास बसाए जाने की है। यह वह लोग हैं, जिन्होंने वर्षों पूर्व अपने गांव से जोशीमठ आकर छोटा-मोटा व्यवसाय शुरू किया और बाद में यहीं बस गए। ऐसे लोगों के लिए सरकार ने पीपलकोटी और ढाक और आसपास कुछ जमीनें चिह्नित की थीं लेकिन इन पर भी अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे लोग बदरीनाथ हाईवे के आसपास ही आवास, दुकान के लिए जमीन चाहते हैं।

Joshimath Sinking Government engaged in making displacement rehabilitation and relief package of affected
विस्थापन का दर्द - फोटो : अमर उजाला

बेनाप भूमि पर बसे हैं सैकड़ों लोग, अब मुआवजे में दिक्कत
आपदा प्रभावितों की एक श्रेणी ऐसे लोगों की भी है जो 50-60 साल से भी अधिक समय से जोशीमठ में बसे हैं लेकिन जमीन उनके नाम पर नहीं है। उनके पास मकान, दुकान है लेकिन मालिकाना हक नहीं है। बेनाप भूमि पर बसे लोग वर्षों से काश्तकारी करते रहे हैं। लेकिन 1958-64 के बाद पूरे राज्य में ही भूमि बंदोबस्त नहीं हो पाया है। इस कारण जोशीमठ के ऐसे तमाम लोगों के नाम खसरा खतौनी में दर्ज नहीं है। ऐसे लोगों के लिए भी जिलाधिकारी स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

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Joshimath Sinking Government engaged in making displacement rehabilitation and relief package of affected
घर छोड़कर जाते लोग। - फोटो : अमर उजाला

बाहर से आकर बसे लोग चाहते हैं एक मुश्त समाधान
कुछ लोग बाहर से आकर जोशीमठ में होटल इत्यादि कारोबार से जुड़े हैं। यह लोग जोशीमठ के मूल निवासी नहीं है लेकिन अब कारोबार के चलते पूरी तरह से जोशीमठ पर ही निर्भर हैं। ऐसे अधिकतर लोग एक मुश्त समाधान (वन टाइम स्टेलमेंट) के पक्ष में हैं। ताकि वह सरकार से राहत पैकेज लेकर इच्छानुसार दूसरी जगह पर कारोबार शुरू कर सकें।

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Joshimath Sinking Government engaged in making displacement rehabilitation and relief package of affected
सामान लेकर निकले लोग - फोटो : अमर उजाला

हाईवे किनारे जमीन चाहते हैं लोग
जोशीमठ में होटल कारोबार से जुड़े अधिकतर लोग बदरीनाथ हाईवे के किनारे जमीन चाहते हैं, ताकि वह फिर से कारोबार शुरू कर सकें। स्थानीय जिला प्रशासन का कहना है कि हर किसी को हाईवे के किनारे जमीन देना संभव नहीं है लेकिन संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

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जोशीमठ आपदा प्रभावित लोगों की विस्थापन, पुनर्वास और राहत पैकेज को लेकर अलग-अलग मांगें हैं। हम सभी का पक्ष सुनकर एकराय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अलावा आपदा प्रभावित लोगों को भी समिति में शामिल किया गया है। जिनके नाम भूमि दर्ज नहीं है, उनका भी समाधान निकाला जा रहा है। - हिमांशु खुराना, जिलाधिकारी, चमोली

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