एक हफ्ते बाद राकेश चंद्र रतूड़ी को घर लौटना था। घर आने का वादा तो किया, लेकिन तिरंगे में लिपटकर जब उसका शव घर पहुंचा तो घर में कोहराम मच गया।
शादी में आने से पहले ही तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा शहीद राकेश का शव, तस्वीरें देख आंखे भर आएंगी
शहीद राकेश का पार्थिव शरीर शाम करीब सात बजे घर पहुंच गया। इससे पहले उनका पार्थिव शरीर आर्मी की तरफ से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से वाहनों से घर तक पहुंचा। पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। जहां पत्नी बार-बार बेसुध हो रही थीं, वहीं बच्चे राकेश से चिपटकर बिलखने लगे। गमगीन नजारा देख मौके पर मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें छलक उठीं। वहीं इस दौरान ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, राकेश तेरा नाम रहेगा’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे भी खूब गूंजे।
घर पहुंचने से आठ दिन पहले हवलदार राकेश चंद्र की मौत की खबर आ गई। राकेश, 22 फरवरी को भतीजी की शामिल होने के लिए दून आने वाले थे। परिवार में शादी की तैयारियां जोरों पर थी। राकेश हर दिन फोन करके शादी के लिए हो रही खरीदारी की जानकारी लेते थे लेकिन परिजनों का कहना है कि तीन दिन से उनका कोई फोन नहीं आया था।
पूरे परिवार का दिल बेचैन था। आखिर मंगलवार की सुबह अचानक राकेश के जम्मू के सुंजवां में फिदायीन हमले में शहीद होने की खबर आई। हमले के बाद चले सेना के सबसे लंबे सर्च ऑपरेशन के दौरान हवलदार राकेश का शव मिला। यह खबर सुनकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी और बच्चे अवाक रह गए। परिवार और नाते-रिश्तेदारों में शादी की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं।
राकेश चंद्र रतूड़ी बेहद मिलनसार और खुशमिजाज थे। वे 22 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गए थे। अलग-अलग जगहों पर पोस्टिंग रहने के बाद भी उन्होंने गांव और नाते-रिश्तेदारों से नजदीकियां बनाए रखीं। वे हर किसी के सुखदुख में शामिल होते थे। राकेश इसी साल दो जनवरी को घर आए थे।