ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर अगर यह बात नहीं जानी तो नुकसान उठाना पड़ेगा।
ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर यह नियम भी जान लें, वरना हाथ मलते रह जाएंगे
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यातायात व्यवस्था में सुधार और सड़क दुर्घटनाओं से बचने के लिए वाहन चालकों को यातायात के बेसिक नियमों की जानकारी आवश्यक है। इसके लिए यातायात विभाग कई तरह के जागरूकता अभियान भी चलाता है। इसके बावजूद लोग यातायात नियमों के प्रति गंभीर नहीं हैं। आरटीओ के ड्राइविंग लाइसेंस अनुभाग के मुताबिक जनवरी से 25 फरवरी तक 5515 लोगों ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया।
इनमें 393 आवेदक लर्निंग टेस्ट में ही फेल हो चुके हैं। इसके अलावा सिम्युलेटर ड्राइव में दो महीने में 396 आवेदक फेल हो चुके हैं। दिलचस्प यह है कि फेल होने वाले अधिकांश लोग खुद वाहन चलाकर टेस्ट देने आरटीओ कार्यालय पहुंचते हैं। जिन्हें ट्रैफिक के बेसिक नियमों की जानकारी होती है। उन्हीं आवेदकों को लाइसेंस जारी किया जाता है। इसके लिए पहले लर्निंग और बाद में स्थायी लाइसेंस के लिए टेस्ट से गुजरना पड़ता है। टेस्ट में ट्रैफिक के बेसिक नियमों की जानकारी संबंधी सवाल पूछे जाते हैं।
कार चालकों के लिए सिम्युलेटर ड्राइव टेस्ट अनिवार्य है। 60 फीसदी अंक आने पर ही स्थायी लाइसेंस जारी किया जाता है। सिम्युलटेर ऑटोमेटिक कंप्यूटराइज्ड मशीन है। आवेदक को इसकी सीट में बैठकर कार की तरह ड्राइव करना होता है। अक्सर लर्निंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देने वाले आवेदक सिम्युलेटर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। लर्निंग लाइसेंस के लिए ट्रैफिक नियमों संबंधी 10 आसान सवालों का जवाब हां या ना में देना होता है। इनमें छह सवाल सही होने पर ही लर्निंग लाइसेंस जारी कर दिया जाता है। लर्निंग के 30 दिन बाद स्थायी लाइसेंस के लिए सिम्युलेटर ड्राइव टेस्ट होता है।