देखिए, रोक के बावजूद कैसे गंगा और यमुना का सीना चीर रहे हैं माफिया
जिले में इस समय 67 क्रशर दिन-रात चल रहे हैं। 10 लोगों ने आवेदन किया हुआ है। ये संख्या तो वैध क्रशरों की है इनकी आड़ में चलने वाले अवैध क्रशरों की तो गिनती ही नहीं है। विकासनगर के आसन वेटलैंड कंजरवेशन रिजर्व के 10 किमी के दायरे में हाईकोर्ट ने यमुना में किसी भी प्रकार के खनन पर रोक लगाई है, लेकिन खनन माफिया यहां दिन-रात यमुना का सीना चीर रहा है। जिससे यमुना में कई जगहों पर गहरी खाइयां बन गई हैं। यमुना की जैव विविधता पर बुरा असर पड़ रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि जिम्मेदार महकमों की खामोशी हैरान करने वाली है। इस बारे में अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं.....
मार्च 2016 में स्वामी शिवानंद का अनशन तुड़वाने के लिए शासन ने रायवाला से भोगपुर तक 22 खनन पट्टों पर रोक लगा दी थी। उसके बाद से उम्मीद जगी थी कि अब क्षेत्र में काफी हद तक अवैध खनन पर रोक लग जाएगी लेकिन, कुछ नहीं हुआ। क्षेत्र में खनन बदसूरत जारी है। गंगा और इसकी सहायक नदियों से दिनरात माफिया अवैध खनन कर रहे हैं। जिले के 67 स्टोन क्रशरों पर खनन सामग्री के ढेर लगे हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि गंगा में खनन का विरोध होने के बाद भी सरकार ने पिछले दो वर्षों में 25 क्रशर लगाने की अनुमति दी। 10 लोग कतार में हैं। इनकेआवेदन पत्र प्रशासन को मिले हुए हैं। जबकि जिले में खनन पट्टे केवल 40 ही हैं। इतनी क्रशरों की संख्या और इतने कम पट्टे साफ दर्शाते हैं कि गंगा में अवैध खनन रुकने वाला नहीं है।
हरिद्वार में तहसीलवार क्रशरों की संख्याः हरिद्वार- 49, भगवानपुर- 16, रुडक़ी- 02, लक्सर-01, हरिद्वार में पिछले सात महीनों में अवैध खनन में पकड़े गए 726 वाहन, एक करोड़ 33 लाख 85 हजार 750 रुपये जुर्माना वसूला गया।
'जिला प्रशासन अवैध खनन रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क है। इस दिशा में कार्रवाई की जा रही है। स्टोन क्रशर लगाने की अनुमति शासन स्तर से दी जाती है। शासन के निर्देशों पर ही इस संबंध में कार्रवाई की जाती है। आगे भी अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।'
- हरबंस सिंह चुघ, जिलाधिकारी हरिद्वार
डाकपत्थर से लेकर रामपुर मंडी तक प्रतिबंधित 10 किमी के दायरे में रोजाना सैकड़ों की संख्या में खनन माफिया की ट्रैक्टर ट्राली और डंपर नदी में खनन के लिए उतरते हैं। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने नवाबगढ़-डाक्टरगंज गांव में यमुना खादर में चल रहे अवैध खनन के खेल को कैमरों में कैद किया। यहां दोपहर 12 बजे पांच से सात ट्रैक्टर ट्रालियां नदी में खनन के लिए उतरी हुई थी। नदी में डंपर भी बेधड़क दौड़ रहे थे। यहां अमर उजाला की टीम करीब एक घंटे रही, लेकिन ट्रैक्टर ट्रालियों के चालकों के चेहरों पर किसी प्रकार का डर नहीं दिखा। सभी मोबाइल के जरिए अपने आकाओं से निर्देश लेते रहे। कुछ देर बाद यह ट्रालियां एक-एक कर गंतव्य के लिए रवाना हो गई। कमोवेश यहीं हाल रामपुर मंडी, ढालीपुर, ढकरानी, नावघाट और सतिघाट में देखने को मिला। एक मोटे अनुमान के हिसाब से यहां रोजाना 100-120 ट्रैक्टर ट्राली अवैध होता है।