पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (हरदा) के स्वागत का अनोखा अंदाज संतों को भी भा गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने पहले तो महामंडलेश्वरों के रथ के आगे पेशवाई मार्ग पर झाड़ू लगाई। इसके बाद ढोल दमाऊ बजाकर संतों का स्वागत किया। स्वागत के अनूठे अंदाज को देख संत भी पूर्व मुख्यमंत्री के मुरीद हो गए। यही नहीं नागा साधुओं ने तो हरीश रावत के सेल्फी खिंचवाकर उनको आशीर्वाद दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की पेशवाई के स्वागत के लिए सोमवार को हरिद्वार पहुंचे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत उन्हें कनखल के देशरक्षक चौक पर पेशवाई का स्वागत करना था, लेकिन देशरक्षक औषधालय में भोजन के बाद वे सीधा शिवडेल स्कूल के पीछे पेशवाई मार्ग की ओर निकल गए। यहां आचार्य महामंडलेश्वर के रथ पहुंचे तो हरीश रावत सड़क पर झाड़ू लगाने लगे। उनको झाड़ू लगाते देख दूसरे कांग्रेस कार्यकर्ता भी सड़क साफ करने लगे।
महाकुंभ 2021: हाथी पर बैठे नागा साधुओं ने अनोखे अंदाज में किया लंबी जटाओं का प्रदर्शन, तस्वीरें...
इसके बाद हरीश रावत ने एक लोक कलाकर से उत्तराखंड का पारंपरिक वाद्य यंत्र लिया और खुद बजाने लगे। इस बीच उन्होंने लोक कलाकारों के साथ पारंपरिक उत्तराखंडी नृत्य भी किया। हरीश रावत ने संतों को फूल माला पहनाकर उनका स्वगत किया।
2 of 6
हरिद्वार में पेशवाई
- फोटो : फाइल फोटो
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की पेशवाई में अखाड़े की परंपरा और लोक संस्कृति का वैभव दिखाई दिया। हाथी, घोड़ों, ऊंटों पर सवार सैकड़ों साधु-संतों और नागाओं ने कुंभ मेला क्षेत्र में प्रवेश किया। तन पर भस्म रमाए श्री दिगंबर नागा और हाथों में लाल ध्वज थामे दिगंबर नागा पेशवाई की शान रहे।
3 of 6
पेश्वाई में झाड़ू लगाते पूर्व सीएम हरीश रावत
- फोटो : अमर उजाला
रथों पर चांदी के सिंहासन पर बैठे आचार्य महांडलेश्वर और महामंडलेश्वरों को श्रद्धालुओं हर हर महादेव के जयकारे के साथ नमन किया। वहीं पंजाब का बैगपाइपर बैंड का सुरमयी संगीत और कदमताल भी श्रद्धालुओं को खूब भाया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने देशरक्षक चौक पर पेशवाई का भव्य स्वागत किया।
4 of 6
हरिद्वार में पेश्वाई
- फोटो : अमर उजाला
कनखल दक्षेश्वर महादेव परिसर से पूरे शाही अंदाज में श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई रवाना हुई। पेशवाई में सबसे आगे अखाड़े के इष्टदेव गुरु कपिल मुनि और शंकर भगवान की पालकी थी। उनके साथ शक्ति स्वरूप भाले भैरव प्रकाश और सूर्यप्रकाश भी चल रहे थे।
5 of 6
हरिद्वार में पेशवाई
- फोटो : अमर उजाला
आचार्य महामंडलेश्वर रथ के चांदी के हौदे पर आशीर्वाद की मुद्रा में बैठ थे। वे भक्तों को पुष्पाशीष भी दे रहे थे। उनके ठीक पीछे अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर राजगुरु स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती करीब 15 फुट के विशाल रथ पर चांदी के चमचमाते सिंहासन पर विराजमान थे। उनका निराला स्वरूप धर्म सत्ता के वैभव को दिखा रहा था।