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पानी की धारा रुकी तो दिखे गंगा नदी के 'जख्म', तस्वीरें...

Fri, 14 Oct 2016 07:06 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 14 Oct 2016 07:06 PM IST
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garbage in river ganga
ganga - फोटो : amar ujala
हरिद्वार में गंगा की धारा बंद हुई तो एक बार फिर मोक्षदायिनी मां गंगा का दर्द सामने आ गया। धर्मनगरी में गंगा और गंगनहर में अब भी कितने गंदे नाले गिर रहे हैं यह साफ दिखाई दे रहा है। इन नालों को देखकर साफ हो गया है कि  एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की सख्ती का कोई असर सरकारी सिस्टम पर नहीं है। आबादी वाले क्षेत्रों से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों तक का कचरा और सीवर सीधे गंगा में गिर रहा है।
garbage in river ganga
ganga

गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए कवायद तो लंबे समय से चल रही है, लेकिन इसका कितना असर हुआ यह आज कल आसानी से देखा जा सकता है। उत्तरी हरिद्वार से लेकर ज्वालापुर तक करीब 20 गंदे नाले गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं। खड़खड़ी में लोकनाथ घाट के पास दो नाले जहां सीधे गंगा में गिर रहे हैं, वहीं खड़खड़ी श्मशान घाट, हरकी पैड़ी क्षेत्र में नाईसोता, कुशा घाट, मायादेवी प्रांगण, ऋषिकुल पुल के पास गिर रहे गंदे नाले सीधे मोक्षदायिनी गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं।
 

garbage in river ganga
ganga

इसके अलावा मायापुर से लेकर जटवाड़ा पुल तक गंगनहर के किनारे बसी अवैध बस्तियां जहां गंगा के दर्द को बढ़ा रही हैं, वहीं प्रेमनगर आश्रम पुल के निकट और ज्वालापुर के मोहल्ला कस्साबान व पुल जटवाड़ा के पास भी गंदे नाले गंगा में गिर रहे हैं। 
 

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garbage in river ganga
ganga

एनजीटी ने पिछले करीब डेढ़ साल से गंगा की प्रदूषण मुक्ति का बीड़ा उठाया हुआ है। मगर दो साल से सिर्फ दावे ही किए जा रहे हैं। पिछले दिनों एनजीटी ने दो होटल सीलकर तेजी जरूर दिखाई, लेकिन गंगा में सीवर व गंदे नाले गिरने से लेकर घाटों पर पालीथिन धड़ल्ले से बिकती है। एनजीटी की सख्ती का कोई असर बंदी के दौरान गंगा में नजर नहीं आ रहा है। प्रदूषण के स्रोत पिछले सालों की तरह इस बार भी नजर आ रहे हैं।
 

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garbage in river ganga
ganga

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे को भी गंदे नाले और सीवर आइना दिखा रहे हैं। चार महीने पहले हरिद्वार में समारोह पूर्वक कार्यक्रम का शुभारंभ होने के बावजूद अभी तक धरातल पर कुछ नजर नहीं आया है। यह हाल तब है जबकि कुंभ 2010 में गंगा की स्वच्छता को लेकर अनशन करने वाली केंद्रीय मंत्री उमा भारती के पास गंगा रक्षा से जुड़े मंत्रालय की जिम्मेदारी है।
 

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