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उत्तराखंड: नदी के उफान ने गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव में मचाई तबाही, डीएम और 700 कांवड़िए फंसे

Fri, 10 Aug 2018 05:54 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Fri, 10 Aug 2018 05:54 PM IST
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flood in uttarkashi kheer ganga debris in many house
kheer ganga - फोटो : amar ujala

श्रीकंठ हिमशिखर के नीचे झिंडा बुग्याल में हुए भूधंसाव से बनी झील टूटने पर बुधवार रात खीर गंगा ने गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव धराली में तबाही मचा दी। वहीं गुरुवार को धराली से आपदा का जायजा लेकर लौट रहे डीएम  डा. आशीष चौहान और उनका काफिला गंगोत्री हाईवे पर डबराणी एवं गंगनानी के बीच भूस्खलन होने से फंस गया। यहां करीब 700 कांवड़ यात्रियों के फंसे होने की भी खबर है।

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kheer ganga

बुधवार रात करीब दस बजे खीर गंगा में उफान के साथ भारी मलबा आया। नदी के मलबे से गंगोत्री हाईवे पर बनी पुलिया चोक होने के बाद ऊपरी हिस्से में मलबे का जमाव बढ़ता चला गया। नदी के पानी के साथ आया मलबा यहां बाढ़ सुरक्षा दीवार को फांद कर 50 से अधिक होटल एवं घरों में जा घुसा। गांव के बीच बनी पुलिया मलबे में दफन हो गई। प्राचीन कल्प केदार मंदिर का आधा हिस्सा मलबे में दब गया। आपदा में नदी से लगे सेब के बागीचों को भारी नुकसान पहुंचा। खीर गंगा का प्रवाह पथ मलबे से पट जाने से अब समूचे धराली गांव और बाजार पर महाविनाश का खतरा मंडराने लगा है।

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kheer ganga

फिर नदी के पानी के साथ मलबा सुरक्षा दीवारों के ऊपर से धराली गांव और बाजार में जा घुसा। नदी में पानी बढ़ने पर धराली में पहले ही अफरातफरी मची थी और जैसे ही मलबा और पानी बस्ती में घुसा तो यहां भगदड़ मच गई। ग्रामीणों और व्यापारियों ने भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई। इस दौरान बिजली गुल होने से अंधेरा पसरने और बारिश ने आपदा की भयावहता को और बढ़ा दिया। ग्रामीणों ने पूरी रात जागकर बिताई।
 

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सूचना मिलने पर बृहस्पतिवार सुबह डीएम डा. आशीष चौहान एवं एसडीएम देवेंद्र नेगी के नेतृत्व में प्रशासन,  एसडीआरएफ और बीआरओ की टीमें मौके पर पहुंची। राजस्व विभाग की टीम क्षति का आकलन करने में जुटी है। यहां जयभगवान पंवार, संजय पंवार, प्रमोद पंवार, दुर्गेश, मुकेश, राकेश, शैलेंद्र पंवार, दिनेश, जयविंदर, धीरेंद्र, बुद्धि सिंह, सतेंद्र पंवार, रामलाल आदि के होटलों तथा करीब तीस आवासीय भवनों की निचली मंजिलों में मलबा भर गया है। महेश पंवार की चक्की आपदा की भेंट चढ़ गई। नदी से लगे सेब के बागीचों में खासा नुकसान हुआ है। मुखबा जाने वाला पैदल रास्ता मलबे से पट गया है। आपदा में बिजली और पेयजल लाइनों को नुकसान पहुंचने से आपूर्ति ठप पड़ी है।
 

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धराली में आई आपदा ने होटल कारोबारियों को सीधा नुकसान तो पहुंचाया ही, साथ ही होटल कारोबार पर टिकी उनकी आजीविका भी छीन ली। आजकल धराली में सेब के बागीचे फलों से लदे हुए थे। काश्तकारों को सेब से अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन खीर गंगा में आई बाढ़ में ज्ञानेंद्र पंवार, जयभगवान आदि आधा दर्जन काश्तकारों के सेब के बागीचों में भारी नुकसान पहुंचा। बाढ़ के मलबे से सेब के फलों से लदे दर्जनों पेड़ क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे इन किसानों की सेब पर टिकी आजीविका चौपट हो गई है।
 

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