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उत्तरकाशी आपदा: मम्मी...मम्मी..चिल्लातीं रही मासूम, आंखों के सामने सैलाब में बह गई मां 

Wed, 21 Aug 2019 10:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 21 Aug 2019 10:00 AM IST
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Uttrakhand News: Flood Disaster in uttarkashi mother swept in front of children painful story
उत्तरकाशी में आपदा - फोटो : अमर उजाला

मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में, शीतल छाया तू दुख के जंगल में...। फिल्म तलाश के इस गीत की हर लाइनें यह संदेश देती हैं कि बच्चों के लिए उसकी मां की कितनी अहमियत है। यदि मासूमों की आंखों के सामने मां सैलाब में बह जाए और वह कुछ न कर पाए तो इससे बड़ा दुख उस बच्चों के लिए और क्या हो सकता है।

Uttrakhand News: Flood Disaster in uttarkashi mother swept in front of children painful story
उपेंद्र - फोटो : अमर उजाला

ऐसा ही कुछ दर्दनाक हादसा भाकुड़ी गांव निवासी उपेंद्र व उसके दो मासूम बच्चों अंशिका (5) व विद्या (3) के साथ हुआ। आराकोट व उसके आसपास के इलाकों में बादल फटने से हुई तबाही के दौरान उपेंद्र व उसके दो मासूम बच्चों के सामने पत्नी तरोजना सैलाब में बह गई। वह तरोजना के साथ दोनों मासूम बेटियों को कंधे पर बैठाकर सुरक्षित स्थान की ओर जा रहा था। तभी सैलाब आ गया और तरोजना बह गई।
 

Uttrakhand News: Flood Disaster in uttarkashi mother swept in front of children painful story
- फोटो : अमर उजाला

पिता के कंधों पर बदहवासी की हालत में बैठी मासूम बेटियां अंशिका व विद्या मां को बेबस सैलाब में बहते देखती रह गईं। मां को सैलाब में बहते देख बेटियां मम्मी... मम्मी... चिल्लाती रहीं और वह सैलाब में गुम हो गई। हादसे के बाद दून अस्पताल में इलाज करा रहे उपेंद्र ने हादसे का हाल बयां किया तो उनका गला भर आया और आंखें नम हो गईं। पत्नी तरोजना को याद करते हुए उपेंद्र ने बताया कि बेटियों के कंधे पर सवार होने की वजह से कुछ भी नहीं कर पाया। अगर बेटियां को छोड़ता को वे दोनों भी सैलाब में बह जातीं।
 

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Uttrakhand News: Flood Disaster in uttarkashi mother swept in front of children painful story
- फोटो : अमर उजाला

हादसे के बाद जो दूसरा सैलाब आया तो उसमें वह भी बह गया था, लेकिन बेटियां सुरक्षित रहीं। सैलाब की चपेट में आने से वह घायल हो गया। मां को अपनी आंखों के सामने भयावह सैलाब में बहते देख दोनों बेटियां गुमसुम हैं। उपेंद्र ने बताया कि उसके माता-पिता की 15 साल पहले ही मौत हो चुकी है। कोई भाई बहन नहीं है। ऐसे में दोनों बेटियों को देखने वाला कोई नहीं है। बहरहाल दोनों बेटियों को उसकी मौसी अपने साथ ले गई है। उपेंद्र को इस बात का मलाल है कि उसकी आंखों के सामने ही पत्नी सैलाब में गुम हो गई और वह कुछ नहीं कर पाया।

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आपदा में घायल - फोटो : अमर उजाला

उत्तरकाशी के आराकोट समेत कई इलाकों में बादल फटने से हुई तबाही के बाद हादसे में घायल लोगाें का दून आने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को एक गर्भवती समेत तीन घायलों को एयर लिफ्ट करके लाया गया। जिनमें आराकोट निवासी निशा व सागर को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया। जबकि आराकोट की ही रहने वाली गर्भवती ललिता को गांधी शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विशेषज्ञों की टीम उसका इलाज कर रही है।
 

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