आपदा में घायल हुए लोगों ने उस मनहूस सुबह की आपबीती सुनाइ तो हर कोई सिहर उठा। ‘हम कई जीप वाले सेब की खेप लेने के लिए लाकुड़ी टिकोची गए थे। सभी लोग जीपों में ही आराम कर रहे थे। रविवार सुबह अचानक विशालकाय पत्थर के साथ बहुत सारा मलबा आया और सब कुछ तहस-नहस कर दिया।’
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आपदा में घायल
- फोटो : अमर उजाला
लोहारी लोकंडी (चकराता) निवासी राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि उनके साथी लोग 27 जीप और सूमो आदि वाहनों के संग टिकोची स्थान पर थे। रविवार को वहां से टिकोची ग्रोवर यूनियन से सेब लेकर उनकी सप्लाई विभिन्न स्थानों पर करनी थी।
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चौहान ने बताया कि वह जालम सिंह के साथ पिकअप वाहन में था। तभी मलबे के साथ एक विशालकाय पत्थर आया। पत्थर से उनकी पिकअप पिचक गई और वे दोनों उसी के अंदर फंस गए। उनके सामने ही मलबे के साथ करीब पांच-छह जीप बह गई।
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इन जीपों में प्रत्येक में पांच से छह आदमी बैठे थे। हम दोनों ने जैक से किसी तरह जीप के हिस्सों को तोड़ा और बाहर निकले। करीब नौ किलोमीटर पैदल चलकर आराकोट पहुंचे। जहां से एयरलिफ्ट कर उन्हें दून अस्पताल पहुंचाया गया।
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आराकोट निवासी सोहन लाल ने बताया कि रविवार सुबह आठ बजे धमाके के साथ बादल फटा और हिमाचल से आ रही पब्बर नदी में पानी बढ़कर गांव में घुस गया। जिससे मकान क्षतिग्रस्त हो गए। उन्होंने दूर भागकर किसी तरह जान बचाई। शनिवार को उन्हें हेलीकॉप्टर से दून अस्पताल पहुंचाया गया।