देखिए जब सुपरस्टर रजनीकांत खच्चर पर सवार होकर यहां जाने के लिए निकले तो क्या हुआ।
आध्यात्मिक प्रवास पर पहुंचे सिने अभिनेता रजनीकांत ने दूसरे दिन पांडवखोली स्थित महावतार बाबा की गुफा में ध्यान लगाया। वह गुफा में करीब एक घंटे तक रहे। गुफा के नीचे स्मृति भवन में पूजा-अर्चना की और आध्यात्मिक चिंतन किया। दोपहर 12 बजे वह द्वाराहाट स्थित अपने मित्र बीएस हरि के निवास गुरुशरण सदन में आ गए।
रविवार सुबह रजनीकांत को उनके मित्रों ने उन्हें हिंदू नववर्ष की बधाई दी। आठ बजे वह योगदा आश्रम से गुफा के लिए कार से निकले। गुफा यहां से करीब 22 किमी दूर है। वह कुकुछिना तक कार से गए। इसके बाद रतखाल से खच्चर पर सवार होकर महावतार बाबा की गुफा पहुंचे। गुफा में उन्होंने एक घंटे तक ध्यान लगाया और साधना की।
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- फोटो : amar ujala
इसके बाद वह गुफा के नीचे स्थित स्मृति भवन गए। जहां उन्होंने बाबा जी की पूजा-अर्चना की और काफी देर तक स्मृति भवन में रहे, यहां भी उन्होंने ध्यान लगाया। दोपहर 12 बजे वह पैदल ही कुकुछिना पहुंचे और अपराह्न दो बजे द्वाराहाट पहुंचे। यहां भोजन के बाद उन्होंने आराम किया।
सिने अभिनेता रजनीकांत ने महावतार बाबा की गुफा से यहां पहुंचने पर पालक पनीर, मटर पनीर, रोटी, दाल, चावल का सेवन किया। शनिवार की रात उन्हें कविता हर्बोला ने पहाड़ी व्यंजन भिंडी की सब्जी, दाल और रोटी परोसी, जिसकी उन्होंने काफी सराहना की। ये भोजन खाकर वे बहुत खुश हुए।