आज से विवाह के लिए शुभ तिथि शुरू हो गई हैं। यद्यपि विवाहों और फेरों के मुहूर्त वर-वधू की जन्म कुंडली देखकर निकाले जाते हैं। इसके बावजूद सायंकाल का गोधूली मुहूर्त विवाह के लिए सबसे उपयुक्त है। यह मुहूर्त दिन में दो बार आता है।
आज से विवाह शुरू, नए जोड़ों के लिए ये मुहूर्त है सबसे खास और शुभ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विवाह का उत्सव शुक्र और गुरु के उदित होने पर मनाया जाता है। इस बार शुक्र तो उदित हो गए है, लेकिन गुरु अभी पश्चिम दिशा में अस्त हैं। देवताओं के बृहस्पति का जागरण सात दिसंबर को पूर्व दिशा में होगा। तब तक विवाहों के मुहूर्त देवोत्थान एकादशी को छोड़कर गुरु जागरण तक नहीं होंगे।
गोधूली बेला का वर्णन प्रत्येक दिन दो समय किया गया है। यह मुहूर्त सीधे-सीधे गाय के वनों में जाने और सायंकाल चरकर वन लौटने से संबंधित रहा है। प्रात:काल जब गाय चरने के लिए वनों को जाती है, तब धूल उड़ती है। इसे प्रात:कालीन गोधूली लगन कहा गया है। दक्षिण भारत में तमाम विवाह प्रात:काल के गोधूली लगन में ही होते हैं। उत्तर और मध्य भारत के विवाह सायंकाल के गोधूली लगन में आयोजित किए जाते हैं।
माना जाता है कि वर-वधु के फेरों के लिए गोधूली लगन सबसे उपयुक्त है। इस लगन में किया गया विवाह स्थायी सुख देने वाला होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सगोत्रीय विवाह अच्छा नहीं है। विपरीत गोत्रों में विवाह होने पर विवाह लंबा चलता है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार बड़े तथा बड़ी पुत्री का विवाह जन्म लगन में नहीं किया जाता। किंतु ऐसा विवाह वर या वधु के छोट पुत्र अथवा छोटी पुत्री होने पर किया जा सका है। बड़े पुत्र या पुत्री का विवाह दूसरे पक्ष की दूसरी अथवा तीसरी संतान से अधिक उत्तम माना गया है।