नगर निकाय चुनाव के लिए गरमाए माहौल के बीच सोमवार को कांग्रेस भवन मर्यादाओं के टूटने का साक्षी बना। कांग्रेस के दो गुट आपस में भिड़ गए। कई बार हाथापाई की नौबत आई। कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महानगर अध्यक्ष को कांग्रेस नेता ने थप्पड़ मार दिया, तो बवाल मच गया। युवकों की एक टोली ने कांग्रेस भवन में जमकर हंगामा काटा। उन्होंने गाली-गलौज की और थप्पड़ मारने वाले कांग्रेस नेता को पार्टी मुख्यालय से बाहर आकर सामना करने की चेतावनी दी।
दिग्गज कांग्रेसी नेता ने महानगर अध्यक्ष के जड़ा थप्पड़, दो गुटों में जमकर मारपीट-गाली गलौज, तस्वीरें
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अनुशासन समिति के अध्यक्ष के साथ जिस कमरे में थप्पड़ मारने वाला कांग्रेस नेता मौजूद था, युवकों की टोली ने वहां जबरदस्ती घुसने की कोशिश की। इस क्रम में जमकर धक्का मुक्की हुई। बामुश्किल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें कांग्रेस भवन से बाहर खदेड़ा। हालत इतने खराब हो गए कि पुलिस को बुलाना पड़ा। शाम को दोनों पक्षों के बीच वार्ता की स्थिति बनी और बाद में समझौता हो गया। पार्टी ने साफ किया है कि इस मामले में समझौता हो जाने के बाद अब किसी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।दोपहर एक बजे करीब झगडे़ की शुरुआत हुई। अनुशासन समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह कांग्रेस भवन पहुंचे, तो उन्होंने टिकट वितरण को लेकर लगातार विरोध जता रहे कांग्रेस नेता राजेंद्र शाह से हल्के फुल्के मूड में बात की। शाह ने आरोप दोहराया कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने ये भी कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के दावेदारों की उपेक्षा की गई है। बिजनौर और बाहर से आने वालों को टिकट दे दिया गया है। इस पर प्रमोद कुमार ने विरोध किया।
उन्होंने कहा कि टिकट वितरण कैसे हुआ है, यह शाह अच्छी तरह जानते हैं। इस बीच, शाह जोर-जोर से बोलने लगे, तो प्रमोद कुमार सिंह के समर्थन में उनके भतीजे और कांग्रेस नेता मानवेंद्र सिंह भी वहां पहुंच गए। उनकी शाह से नोक-झोंक हो गई। माहौल गरमा गया। इस बीच, एक समय मामला कुछ देर के लिए शांत हुआ, मगर फिर मानवेंद्र जब एक बार फिर से शाह को तलाशने लगे, तो उनके समर्थन में कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महानगर अध्यक्ष कमर ताबी सामने आ गए। इस बीच, मानवेंद्र सिंह ने उन्हें एक थप्पड़ मार दिया। इससे पूरा माहौल गरमा गया। थप्पड़ प्रकरण के कुछ समय तक कांग्रेस भवन में मामला शांत रहा। इस बीच, कमर ताबी ने फोन कर के अपने साथ के युवाओं को कांग्रेस भवन बुला लिया। ये युवा गाली-गलौज करते हुए कांग्रेस भवन में घुस आए और मानवेंद्र सिंह को ललकारने लगे। इन युवाओं को किसी तरह से कांग्रेस भवन से बाहर किया गया।
पार्टी भवन के मुख्य गेट पर खडे़ होकर इन युवाओं ने गाली गलौज का क्रम जारी रखा। दून महानगर के अध्यक्ष लाल चंद्र शर्मा और वरिष्ठ नेता अशोक वर्मा ने उन्हें समझाया-बुझाया। इस बीच, मानवेंद्र सिंह भी उनसे भिड़ने के लिए एक बार बाहर आए, लेकिन उन्हें बाकी लोग अंदर कमरे में ले गए। युवाओं की टोली काफी देर तक बाहर खड़ी रही। एक बार फिर उन्होंने जोर लगाया और उस कमरे में घुसने लगे, जहां पर प्रमोद कुमार और मानवेंद्र सिंह बैठे थे। यहां दरवाजे पर महानगर अध्यक्ष लाल चंद्र शर्मा खडे़ हो गए और उन्होंने अन्य लोगों के साथ युवाओं को अंदर घुसने से रोका। इस बीच, पुलिस भी बुला ली गई। बाद में युवाओं को फिर से खदेड़ कर बाहर कर दिया गया। मामला बिगड़ता देखकर कांग्रेस के नेताओं ने अल्पसंख्यक नेताओं को इस प्रकरण में शामिल किया। प्रदेश सचिव आजाद अली और कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ताहिर अली के साथ लेकर कांग्रेस नेताओं ने दोनों पक्षों के साथ वार्ता की।
शाम को सभी पक्षों के साथ बैठक का दौर चला। युवाओं की टोली मानवेंद्र सिंह के स्तर पर माफी मांगने पर कुछ देर के लिए अड़ी, मगर बाद में दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हो गए। मीडिया की मौजूदगी में मानवेंद्र और कमर ताबी के हाथ और गले मिले। मामले का पटाक्षेप हो गया। हंगामे के बाद अनुशासन समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने इस्तीफे की पेशकश की। उन्होंने अध्यक्ष से फोन पर बातचीत की और कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है, तो उनका इस पद पर रहना फिजूल है। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि यह परिवार का मामला है। निकाय चुनाव के लिए तमाम लोगों की अपेक्षाएं हैं। टिकट किसी एक को मिलना है, ये सब जानते हैं। ऐसे में इस तरह की चीजें राजनीति में चलती रहती है। कौन सा राजनीतिक दल ऐसा है, जहां चुनाव के दौरान ऐसी स्थिति नहीं आती। कई सारी स्थितियां होती हैं, जिसके बीच में निर्णय लेने पड़ते हैं। हमारा ध्यान अनुशासनात्मक कार्रवाई से ज्यादा मजबूती से चुनाव लड़ने पर केंद्रित है।