नोटबंदी उत्तराखंड में सहकारी बैंकों की साख पर ऐसा बट्टा लगा गई है, जिससे उबरना बहुत मुश्किल होगा। अब सहकारी बैंकों के खाता धारक तेजी से अपना जमा पैसा निकाल रहे हैं। पैसा जमा होने की रफ्तार धीमी है।
नोटबंदी के बाद सहकारी बैंकों को लगा बड़ा झटका, उबरना मुश्किल
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ऊधमसिंहनगर जिला सहकारी बैंक से दो महीने के भीतर खाता धारकों ने 35 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। अन्य बैंकों से भी ऐसे ही संकेत मिल रहे हैं। लोग अब सहकारी बैंकों में ज्यादा पैसा रखने के मूड में नहीं है। नई सरकार के सामने ये सबसे बड़ी चुनौती होगी।
सहकारी बैंक दस जिलों में संचालित किए जा रहे हैं। पूरे प्रदेश में इन बैंकों की 262 शाखाएं काम कर रही हैं। साढे़ तीन लाख खाता धारक इन बैंकों से जुडे़ हैं। सहकारी समितियां अलग हैं।
नोटबंदी के तुरंत बाद सहकारी बैंकों के पुराने नोट जमा न करने के फैसले ने इनकी साख पर सबसे ज्यादा असर डाला। खाता धारकों में ये धारणा तेजी से फैली कि अन्य बैंकों के मुकाबले जिला सहकारी बैंकों का कोई न कोई कमजोर पहलु जरूर है। इसके बाद, लोगों ने तेजी से इन बैंकों से पैसा निकालना शुरू कर दिया।
सहकारी बैंकों ने राज्य सरकार के निर्देश पर किसानों और अन्य वर्गों के लिए कई ऐसी योजनाओं की शुरूआत की, जो सब्सिडी पर आधारित थी। इसका भुगतान राज्य सरकार को करना था, लेकिन नहीं किया गया। इस वक्त जिला सहकारी बैंकों का राज्य सरकार के स्तर पर 78 करोड़ का भुगतान होना बाकी है।