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Chardham Yatra 2024: सारी थकान दूर कर देता है गंगनानी कुंड, जानिए कैसे पहुंच सकते हैं इस खास जगह

Fri, 03 May 2024 02:52 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 03 May 2024 02:52 PM IST
सार

चारधाम यात्रा पर आए तो गंगनानी की सैर जरूर करें। उत्तरकाशी से 42 किमी दूरी पर गंगोत्री हाईवे पर स्थित गंगनानी कुंड बेहद खास है।

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Chardham Yatra 2024 Visit Special Places Gangnani Kund Gangnani Uttarkashi Uttarakhand
गंगनानी कुंड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अगर आप चारधाम यात्रा पर आ रहे हैं तो गंगोत्री धाम जाते समय गंगनानी कुंड जरूर जाएं। दरअसल, गंगोत्री मार्ग पर स्थित इस कुंड में 12 महीने पानी गर्म रहता है। इस कुंड में स्नान करने से चारधाम यात्रा की सारी थकान दूर हो जाती है।

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जिला मुख्यालय से करीब 42 किमी की दूरी पर गंगनानी नामक स्थान है। यहां गंगोत्री हाईवे के दायीं ओर सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ पर है गंगनानी कुंड। चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु हों या पर्यटक यहां रुककर कुंड में स्नान करना नहीं भूलते हैं।

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शुरुआत में कुंड का जल कुछ गर्म सा लगता है, लेकिन जब कुंड में स्नान के लिए उतरते हैं तो यह ज्यादा गर्म नहीं लगता। बताते हैं कि गंधक और सल्फर युक्त यह गर्म जल शरीर में त्वचा संबंधी चर्म रोग, दाद-खाज व खुजली जैसी तकलीफों को दूर करने में सहायक है। यही कारण है कि ऑफ सीजन में भी वर्षभर यहां पर्यटक पहुंचते रहते हैं। कड़ाके की सर्दी के बीच कुंड के गर्म जल में स्नान का अपना ही आनंद रहता है।

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पराशर ऋषि के मंदिर के भी कर सकते हैं दर्शन

गंगनानी कुंड के पास पराशर ऋषि का मंदिर भी है। पराशर ऋषि एक दिव्य और अलौकिक शक्तियों के ऋषि थे। वह भगवान शिव के अनन्य उपासक थे। वह महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास के पिता थे। उन्होंने ही वैदिक ज्योतिष शास्त्र का निर्माण किया था।

दो कुंड हैं मौजूद

गंगनानी में एक नहीं बल्कि दो कुंड हैं। जिसमें महिलाएं स्नान करती हैं उसे वशिष्ठ कुंड कहते हैं। जिसमें पुरुष स्नान करते हैं उसे व्यास कुंड कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहां पर वेदव्यास के पिता महर्षि पराशर ने हजारों सालों तक तपस्या की थी, तब इस गर्म जल का उद्गम हुआ।

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कैसे पहुंचे

गंगनानी गर्म कुंड जिला मुख्यालय से करीब 42 किमी दूरी पर है। जहां के लिए बस या टैक्सी से पहुंचा जा सकता है। वाहन पार्क कर सीढ़ियां चढ़कर दायीं ओर पहाड़ पर बने कुंड तक पहुंचा जाता है। वर्तमान में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए होटल व रेस्टोरेंट का निर्माण हो गया है।

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